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चंद्रग्रहण 2020 - Chandra Grahan 2020


ग्रह गोचर में सूर्य और चंद्र के बीच जब पृथ्वी आ जाती है और पृथ्वी की छाया चंद्र ग्रहण के ऊपर पड़ती है तो चंद्र ग्रहण का परिदृश्य सामने होता है। यह एक अद्भुत खगोलीय घटना है। चंद्र ग्रह मंडल में हमारे सबसे क़रीब होने के कारण उनकी प्रतिदिन की बदलती हुई अवस्थाओं (कलाओं) एवं ग्रहण की अवस्था बिलकुल भिन्न होती है, जिससे कि लोग उस परिदृश्य को देखकर अचंभित होते हैं। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार चंद्रग्रहण से प्राणियों के ऊपर बुरा असर पड़ता है क्योंकि चन्द्र, ग्रहमंडल में एक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं पौराणिक शास्त्रों के अनुसार चंद्र ग्रहण राहु और केतु के कारण होता है। चन्द्रमा क्योंकि हमारे मानसिकता के कारक ग्रह हैं इसलिए उनको ग्रहण हो जाना ख़ासकर के ग्रहण जिस भी वार, नक्षत्र, राशि, और योग में चंद्रग्रहण होता है निश्चित रूप से उन लोगों की मानसिकता के लिए यह शुभ नहीं होता है और बहुत प्रकार की पीड़ा दायक होता है। राहु और चंद्र की युति को ही ग्रहण कहा गया है।

कितने प्रकार का होता है चंद्रग्रहण?

जन्म पत्रिका में राहु और चंद्र की स्थिति एक साथ होने पर व्यक्ति को भ्रमकता, बहम, संशय के कारण किसी भी निर्णय पर नही पहुँच पाते है। ज्योतिष शास्त्र में कई प्रकार के चंद्र ग्रहण बताए गए हैं, जो की राहु और चन्द्र की अलग अलग प्रकार की स्थितियों से बनते हैं। जिस समय राहु के द्वारा चन्द्रमा के एक विशेष खंड को मलीन किया जाए तो उसे खंडग्रास ग्रहण कहा जाता है। इसके साथ ही यदि चंद्रमा के ऊपर राहु पूर्ण रूप से आच्छादित कर उसे मलीन कर देता है तो इसको पूर्ण चंद्रग्रहण कहते हैं, यदि चंद्र का एक तरफ़ का हिस्सा राहु छाया के द्वारा मलीन हो रहा हो तथा वहा दूसरी तरफ छाया बढ़ रही हो तो उस स्थिति को खग्रास चंद्र ग्रहण कहते हैं। इसी प्रकार से चंद्र ग्रह के मध्य भाग को राहु की छाया मलीन करें और बाहरी हिस्सा कंगन की तरह चमकता दिखाई दे, उस स्थिति को कंकण चंद्र ग्रहण कहा जाता है।

वैदिक ज्योतिष के अनुसार चन्द्रग्रहण

चंद्रग्रहण की तीन प्रकार की स्थितियाँ शास्त्रों में बतायी गई है:

  • सर्व प्रथम ग्रहण प्रारंभ होता है।
  • चंद्र ग्रहण की दूसरी स्थिति को मध्यकाल कहा जाता है।
  • चंद्र ग्रहण की साथ ही अंतिम स्तिथि को मोक्षकाल कहा जाता है।

चंद्रग्रहण के दौरान बरते ये सावधानियां (क्या करें और क्या नहीं)

  • शास्त्रों के अनुसार चंद्रग्रहण के प्रारंभ समय में स्नान करना चाहिए।
  • तत्पश्चात् अपने इष्टदेव का जप हवन पूजा इत्यादि करने से बहुत पुण्य अर्जित होते है। साथ ही यह एक सिद्ध योग भी होता है और सिद्धी प्रदान करने वाला होता है।
  • इसके साथ ही मोक्ष की अवस्था में जब ग्रहण समाप्त हो रहा हो उस समय अन्न, सप्त अनाज इत्यादि का दान कर स्नान कर लेना चाहिए।
  • ख़ासकर के किसी भी प्रकार का शुभ कर्म चंद्रग्रहण के अवस्था में नहीं करना चाहिए हो सके तो भोजन का भी परित्याग कर देना चाहिए।
  • गर्भवती स्त्री को चंद्रग्रहण के समय घर में ही एकान्त स्थान में जाकर धार्मिक पुस्तकों का पठन करना चाहिए।

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चंद्र ग्रहण 2020 तिथि व समय

चंद्र ग्रहण तिथि
खाग्राश चंद्र ग्रहण मंगलवार, 26 मई, 2020
खंडाग्रास चंद्र ग्रहण शुक्रवार, 19 नवंबर, 2021
मंगल गोचर

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बुध गोचर

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शनि गोचर

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केतु गोचर 2020

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सूर्य ग्रहण

सूर्य ग्रहण 2020

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सूर्य गोचर

सूर्य गोचर 2020

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चंद्र गोचर

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