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मीन राश‍ि (Meen Rashi) - Pisces in Hind

मीन राश‍ि (Pisces) का स्थान राश‍ि चक्र और तारामंडल में बारहवें स्थान पर है। यह राश‍ि उत्तर दिशा में वास करने वाली एकमात्र उभयोदय राश‍ि है। अर्थात इस राश‍ि के मुख और पूंछ दोनों ओर से है। तारामंडल में इस राश‍ि का प्रारंभ 331 डिग्री से लेकर 360 डिग्री के अंतर्गत होता है। मीन राश‍ि की आकृति एक वृत्त में दो मछल‍ियों के समान है जो कि एक-दूसरे के पूंछ पर मुख रखे हुए है। मीन राश‍ि (Meen Rashi) द्व‍िस्वभाव संज्ञक तथा सौम्य प्रकृति की जल तत्व राश‍ि कही गई है। इस राश‍ि के स्वामी बृहस्पति तथा इसका वर्ण उज्जवल श्वेत है् कालपुरुष के शरीर में मीन राश‍ि का स्थान दोनों पैर में कहा गया है। मीन राश‍ि का निवास स्थान जल है यानी नदी नाले पोखर समुद्र जैसे जलाशय हैं। यह स्त्री लिंग सम और सौम्य राश‍ि है।  online kundali in hindi के माध्यम से मीन राश‍ि से जुड़े ये सभी ज्योतिषीय तथ्य विस्तार से समझे जा सकते हैं।

मीन राश‍ि  (Meen) - होरा, द्रैष्काण, सप्तमांश

सभी राश‍ियों के समान मीन राश‍ि के दो होरा है। पहली होरा 15 अंश की और दूसरी होरा भी 15 अंश की है। पहली होरा के स्वामी चंद्रमा और दूसरी होरा के स्वामी सूर्य है। मीन राश‍ि के तीन द्रैष्काण होते हैं। पहला द्रैष्काण दस डिग्री का है। इसी प्रकार तीनों द्रैष्काण में तीस डिग्री की पूरी राश‍ि आती है। मीन राश‍ि के प्रथम द्रैष्काण का स्वामी बृहस्पति, दूसरे का स्वामी चंद्र, तीसरे द्रैष्काण का स्वामी मंगल है। इन सूक्ष्म विभाजनों को समझना astrology in Hindi में ग्रहों के प्रभाव जानने के लिए अत्यंत आवश्यक माना जाता है।

मीन राश‍ि (Pisces) के 7 सप्तमांश होते हैं। पहले सप्तमांश का स्वामी बुध, दूसरे का शुक्र, तीसरे का मंगल, चौथे का बृहस्पति, पांचवे का शन‍ि, छठे का भी शन‍ि और सातवें का स्वामी बृहस्पति कहा गया है। जिसमें सही ज्योतिष परामर्श व्यक्ति को जीवन के महत्वपूर्ण निर्णय लेने में सहायता करता है।

मीन राश‍ि  (Meen) - नवमांश, दशमांश

मीन राश‍ि के 9 नवमांश होते हैं। एक नवमांश 3 अंश का और 20 विकला से संपूर्ण है। पहले नवमांश का स्वामी चंद्र, दूसरे का सूर्य, तीसरे का बुध, चौथे का शुक्र, पांचवे का मंगल, छठे का बृहस्पति, सातवें का शन‍ि, आठवें का भी शन‍ि और नौवें का स्वामी बृहस्पति है। अब आते हैं मीन राश‍ि के दशमांश की ओर। मीन राश‍ि के 10 दशमांश होते हैं। हर एक दशमांश के 3 अंश होते हैं। पहले दशमांश के स्वामी मंगल, दूसरे के स्वामी बृहस्पति, तीसरे का स्वामी शन‍ि, चौथे का भी शन‍ि, पांचवे का स्वामी बृहस्पति, छठे का स्वामी मंगल, सातवें का शुक्र, आठवें का बुध, नौवें का चंद्र और दसवें का स्वामी सूर्य होता है।

मीन राश‍ि  (Meen) - द्वादशांश, षोडशांश

मीन राश‍ि के 12 द्वादशांश होते हैं। प्रत्येक द्वादशांश 2 अंश और 30 कला का कहा गया है। मीन राश‍ि (Meen Rashi) के पहले द्वादशांश का स्वामी बृहस्पति, दूसरे का मंगल, तीसरे का शुक्र, चौथे का बुध, पांचवे का चंद्र, छठे का सूर्य, सातवें का बुध, आठवें का शुक्र, नौवें का मंगल, दसवें का स्वामी बृहस्पति, ग्यारहवें का शन‍ि और बारहवें का स्वामी भी शन‍ि कहा गया है। इन्हीं फलादेशों के आधार पर मीन राश‍ि के जातकों के लिए उपयुक्त रत्न का चयन भी किया जाता है, जिससे ग्रहों की अनुकूलता बढ़ाई जा सके।

अब आते हैं मीन राश‍ि के षोडशांश की ओर। मीन राश‍ि के 16 षोडशांश होते हैं। एक षोडशांश 1 अंश, 52 कला और 30 विकला के होते हैं। मीन राश‍ि (Pisces) के पहले षोडशांश का स्वामी बृहस्पति, दूसरे का शन‍ि, तीसरे का भी शन‍ि, चौथे का स्वामी बृहस्पति, पांचवे का मंगल, छठे का शुक्र, सातवें का बुध, आठवें का चंद्रमा, नौवें का सूर्य, दसवें का स्वामी बुध, ग्यारहवें का शुक्र, बारहवें का स्वामी मंगल, तेरहवें का बृहस्पति, चौदहवें का शन‍ि, पंद्रहवें का भी शन‍ि और सोलहवें का स्वामी बृहस्पति है।

मीन राश‍ि  (Meen) - त्र‍िशांश, षष्टयंस, नक्षत्र

मीन राश‍ि के 5 त्रिशांश होते हैं। पहला त्रिशांश 5 अंश का और इसके स्वामी शुक्र हैं। दूसरा त्रिशांश 7 अंश का और इसके स्वामी बुध हैं। तीसरा त्रिशांश 8 अंश का और इसके स्वामी बृहस्पति हैं। चौथा त्रिशांश 5 अंश का और इसके स्वामी शन‍ि हैं। पांचवा त्रिशांश 5 अंश का और इसके स्वामी मंगल हैं।

इसी क्रम में मीन राश‍ि (Pisces) के 60 षष्ट्यंस होते हैं जिसके 30 कला अर्थात आधा अंश होता है। इनके स्वामी कुछ इस प्रकार हैं। पहला इन्दुरेखा, दूसरा भ्रमण, तीसरा सुधासयो, चौथा अतिश‍ित, पांचवा अशुभ, छठा शुभ, सातवां निर्मल, आठवां दंडायुत, नौंवा कालाग्न‍ि, दसवां प्रवीण, 11वां इन्दुमुख, 12वां दृष्टकराल, 13वां सुशीतल, 14वां मृदु, 15वां सौम्य, 16वां कालरूप, 17वां उत्पात, 18वां वन्शछय, 19वां मुख्या, 20वां कुलनाश, 21वां विश्दाग्ध, 22वां पूर्णचंद्र, 23वां अमृत, 24वां सुधा, 25वां कंटक, 26वां अधम, 27वां घोर, 28वां दावाग्न‍ि, 29वां काल, 30वां मृत्यु, 31वां मन्दात्मज, 32वां मलकर, 33वां क्ष‍ितिज, 34वां कल‍िनाश, 35वां आर्द्र, 36वां देव, 37वां दिगंबर, 38वां वागीश, 39वां विष्णु, 40वां पद, 41वां कोमल, 42वां मिर्दु, 43वां चंद्र, 44वां अमृत, 45वां सर्प, 46वां कला, 47वां इंद्र, 48वां वरुण, 49वां यम, 50वां माया, 51वां देव, 52वां अग्न‍ि, 53वां कुलघ्न, 54वां भ्रष्ट, 55वां किन्नर, 56वां यक्ष, 57वां कुबेर, 58वां राक्षस, 60वां घोर। मीन राश‍ि के ये 60 षष्ट्यंस अपने नाम के अनुसार ही जातकों को शुभ और अशुभ फल देते हैं।

मीन राश‍ि में सत्ताइस नक्षत्रों के 108 चरणों में कुल नौ चरण पूर्वाभाद्रपदा से रेवती तक जिसमें क‍ि पूर्वभाद्रपदा नक्षत्र का अंतिम चरण जिसके वर्ण अक्षय हैं। पूर्वाभाद्रपदा 4 दी, उत्तरभाद्रपदा 1 दू, 2 थ, 3 झ, 4 ञ, रेवती 1 दे, 2 दो, 3 चा, 4 ची, कुल मिलाकर के ये नौ चरण मीन राश‍ि के हैं। सभी चरण 3।20 डिग्री का है और प्रत्येक चरणों के नक्षत्र स्वामी भी बृहस्पति के साथ अलग-अलग होते हैं।

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