>
पर्व तिथि: सोमवार, 14 सितंबर 2026 गणेश विसर्जन (अनंत चतुर्दशी): गुरुवार, 24 सितंबर 2026 उत्सव अवधि: 10 दिन (गणेशोत्सव)
गणेश चतुर्थी — जिसे विनायक चतुर्थी या गणेशोत्सव भी कहा जाता है — हिंदू धर्म के सबसे प्रमुख और उल्लासपूर्ण पर्वों में से एक है। यह पर्व भगवान श्री गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है — जो भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र हैं और समस्त विघ्नों के हर्ता, बुद्धि, समृद्धि तथा नए आरंभ के देवता हैं।
यह पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है, जो अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार प्रायः अगस्त या सितंबर में पड़ती है। गणेशोत्सव 10 दिनों तक चलता है और अनंत चतुर्दशी पर भव्य गणेश विसर्जन के साथ समाप्त होता है।
|
विवरण |
तिथि / समय |
|
गणेश चतुर्थी 2026 |
सोमवार, 14 सितंबर 2026 |
|
चतुर्थी तिथि प्रारंभ |
13 सितंबर 2026 (सायंकाल) |
|
चतुर्थी तिथि समाप्त |
14 सितंबर 2026 (अपराह्न) |
|
मध्याह्न पूजा मुहूर्त |
लगभग प्रातः 11:00 – अपराह्न 1:30 |
|
गणेश विसर्जन (10वाँ दिन) |
24 सितंबर 2026 |
AstroSwamig के ज्योतिषाचार्यों की विशेष टिप्पणी: वर्ष 2026 में गणेश चतुर्थी सोमवार को पड़ रही है, जो अत्यंत शुभ संयोग है। सोमवार भगवान शिव का दिन है, और गणेशजी उन्हीं के पुत्र हैं — इस दिन की पूजा दोगुना फल देने वाली मानी जाती है।
वैदिक पंचांग के अनुसार गणेश चतुर्थी पर मध्याह्न काल (दोपहर का समय) गणेश पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इसी समय गणेश स्थापना (प्रतिमा की स्थापना) और षोडशोपचार पूजा की जाती है। इस मुहूर्त में की गई पूजा से भगवान गणेश का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।
|
दिन |
तिथि |
महत्व |
|
पहला दिन – आरंभ |
14 सितंबर |
गणेश स्थापना (प्रतिष्ठापना) |
|
दूसरा दिन |
15 सितंबर |
पूजा-अर्चना व भजन का प्रारंभ |
|
तीसरा दिन |
16 सितंबर |
सामुदायिक आयोजन व सांस्कृतिक कार्यक्रम |
|
चौथा दिन |
17 सितंबर |
मोदक एवं विशेष नैवेद्य |
|
पाँचवाँ दिन |
18 सितंबर |
पंचमी विसर्जन (5-दिवसीय विकल्प) |
|
छठा दिन |
19 सितंबर |
भक्ति कार्यक्रम एवं प्रसाद वितरण |
|
सातवाँ दिन |
20 सितंबर |
सप्तमी पूजा |
|
आठवाँ दिन |
21 सितंबर |
अष्टमी विशेष आरती |
|
नौवाँ दिन |
22 सितंबर |
नवमी – विशेष पूजन |
|
दसवाँ दिन – विसर्जन |
24 सितंबर |
अनंत चतुर्दशी – भव्य विसर्जन |
पुराणों के अनुसार, एक बार माता पार्वती ने स्नान से पूर्व अपने शरीर के उबटन (चंदन लेप) से एक बालक की रचना की और उसमें प्राण फूँककर उसे द्वार का रक्षक नियुक्त किया। जब भगवान शिव वापस लौटे तो गणेश ने उन्हें भीतर जाने से रोक दिया, क्योंकि वे उन्हें पहचानते नहीं थे। क्रोधित शिव ने उनका मस्तक काट दिया।
माता पार्वती के विलाप को देखकर शिवजी ने अपने गणों को उत्तर दिशा की ओर मुँह करके सोए पहले प्राणी का मस्तक लाने की आज्ञा दी। गण एक हाथी का मस्तक लेकर लौटे, जिसे बालक के धड़ पर लगाकर शिवजी ने उन्हें जीवनदान दिया। इसी के साथ शिवजी ने उन्हें गणों का अधिपति घोषित किया और नाम दिया — गणपति।
हिंदू परंपरा में कोई भी शुभ कार्य, पूजा, यात्रा या नया व्यवसाय आरंभ करने से पहले भगवान गणेश की वंदना की जाती है। शास्त्रों के अनुसार, भगवान शिव ने यह वरदान दिया था कि गणेश को सर्वप्रथम पूजा जाएगा — क्योंकि उनकी कृपा के बिना कोई भी कार्य सिद्ध नहीं होता।
गणेश चतुर्थी की प्राचीन वैदिक जड़ें हैं, परंतु इसे सार्वजनिक उत्सव का स्वरूप 19वीं शताब्दी में महान स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने दिया। सन् 1893 में तिलक ने इस उत्सव को एक राष्ट्रीय एकता के मंच के रूप में प्रस्तुत किया, जिससे जाति-वर्ग के भेद मिटाकर समाज को एकजुट किया जा सके और स्वतंत्रता आंदोलन को नई ऊर्जा मिले।
उनकी इस दृष्टि ने गणेश चतुर्थी को घरेलू पूजा से निकालकर एक भव्य 10 दिवसीय सामाजिक उत्सव में बदल दिया — यह परंपरा आज महाराष्ट्र, विशेषकर मुंबई और पुणे में सबसे भव्य रूप में जीवित है।
भक्त घर में या सार्वजनिक पंडाल में मिट्टी की गणेश प्रतिमा लाते हैं। प्रतिमा को ऊँचे आसन पर स्थापित करके फूलों से सजाया जाता है और प्राणप्रतिष्ठा के माध्यम से उसमें दिव्य चेतना का आवाहन किया जाता है।
मुख्य पूजा में भगवान गणेश को 16 पारंपरिक वस्तुएँ अर्पित की जाती हैं:
मोदक — जो गुड़ और नारियल के मिश्रण से बना चावल या गेहूँ के आटे का लड्डू/पकौड़ी होता है — गणेशजी का सबसे प्रिय नैवेद्य है। मोदक अर्पित करने से बुद्धि, सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
10 दिनों तक भक्त निम्न पवित्र मंत्रों का जाप करते हैं:
संत समर्थ रामदास रचित प्रसिद्ध सुखकर्ता दुःखहर्ता आरती विशेष भक्तिभाव से गाई जाती है।
दसवें दिन — 24 सितंबर 2026 (अनंत चतुर्दशी) को — गणेश प्रतिमा को भव्य शोभायात्रा के साथ जल में विसर्जित किया जाता है। यह क्रिया प्रतीकात्मक रूप से गणेशजी का कैलाश पर्वत की ओर प्रस्थान दर्शाती है। साथ ही यह सृष्टि के चक्र — उत्पत्ति और विलय — का भी प्रतीक है।
गणेश चतुर्थी की एक प्रमुख मान्यता है कि इस रात चंद्रमा को नहीं देखना चाहिए। पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार चंद्रदेव ने गणेशजी के हाथी जैसे रूप पर हँसी उड़ाई। क्रोधित गणेश ने चंद्रदेव को शाप दिया कि जो भी इस तिथि को उन्हें देखेगा, उस पर मिथ्या कलंक लगेगा।
इसी शाप के प्रभाव से भगवान श्रीकृष्ण पर स्यमंतक मणि चुराने का झूठा आरोप लगा था। इसीलिए भक्त गणेश चतुर्थी की रात को चंद्र दर्शन से बचते हैं।
वैदिक ज्योतिष के अनुसार गणेश चतुर्थी का विशेष ग्रहीय महत्व है:
AstroSwamig.com के विशेषज्ञ ज्योतिषी आपकी जन्म कुंडली के अनुसार गणेश चतुर्थी 2026 के लिए व्यक्तिगत पूजा विधि, मंत्र और दान की सलाह देंगे। अभी परामर्श लें!
मुंबई और पुणे में गणेशोत्सव की भव्यता अतुलनीय है। लालबागचा राजा और कसबा गणपति विश्वभर के भक्तों की आस्था के केंद्र हैं। लाखों श्रद्धालु 10 दिनों तक इन दर्शनों के लिए उमड़ते हैं।
यहाँ इसे विनायक चवितhi के नाम से जाना जाता है और राज्य स्तर पर बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।
यहाँ घरों और सार्वजनिक पंडालों में उत्साहपूर्वक उत्सव मनाया जाता है।
विनायगर चतुर्थी के रूप में विशेष मंदिर पूजा और घरेलू अनुष्ठान किए जाते हैं।
अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर और मलेशिया में भी भारतीय समुदाय इस उत्सव को पूरी आस्था और उत्साह के साथ मनाता है।
हाल के वर्षों में पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से इको-फ्रेंडली उत्सव की ओर लोगों का रुझान बढ़ा है। 2026 में आप इस प्रकार जिम्मेदारी से उत्सव मनाएँ:
पर्यावरण-हितैषी उत्सव गणेशजी की उस भावना के अनुरूप है जो प्रकृति की बुद्धि के देवता हैं।
विघ्नहर्ता मंत्र:
ॐ गं गणपतये नमः
वक्रतुंड मंत्र:
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ | निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ||
गणेश गायत्री मंत्र:
ॐ एकदन्ताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि | तन्नो दन्ति प्रचोदयात् ||
14 सितंबर 2026 को मध्याह्न मुहूर्त में इन मंत्रों का 108 बार जाप करना — करियर, स्वास्थ्य, परिवार और व्यवसाय में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है।
|
नैवेद्य |
महत्व |
|
मोदक |
गणेशजी का प्रिय मिष्ठान — बुद्धि और आनंद का प्रतीक |
|
दूर्वा घास |
पापनाशक और दीर्घायु प्रदान करने वाली |
|
लाल गुड़हल (जपा) |
सफलता और मनोकामना पूर्ति के लिए |
|
नारियल |
अहंकार-समर्पण का प्रतीक |
|
लड्डू |
समृद्धि के लिए |
|
केला |
पूर्णता और तृप्ति का प्रतीक |
प्र: गणेश चतुर्थी 2026 कब है?
उ: गणेश चतुर्थी 2026 सोमवार, 14 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी।
प्र: गणेश विसर्जन 2026 कब होगा?
उ: गणेश विसर्जन (अनंत चतुर्दशी) गुरुवार, 24 सितंबर 2026 को होगा।
प्र: गणेश पूजा का सबसे शुभ समय क्या है?
उ: 14 सितंबर 2026 को मध्याह्न मुहूर्त — लगभग प्रातः 11:00 से अपराह्न 1:30 बजे के बीच — सर्वश्रेष्ठ है।
प्र: गणेश चतुर्थी पर चाँद क्यों नहीं देखते?
उ: पौराणिक कथा के अनुसार, इस तिथि को चंद्र दर्शन करने पर मिथ्या कलंक लगता है — यह गणेशजी के चंद्रदेव को दिए शाप के कारण है।
प्र: गणेश चतुर्थी पर कौन सा मिष्ठान चढ़ाते हैं?
उ: मोदक — यह गणेशजी का सबसे प्रिय नैवेद्य है।
प्र: क्या गणेश चतुर्थी 2026 पर सार्वजनिक अवकाश होगा?
उ: हाँ, यह महाराष्ट्र, कर्नाटक, गोवा, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में सार्वजनिक अवकाश है।
गणेश चतुर्थी 2026 14 सितंबर को है। आधिकारिक पूजा मुहूर्त, विसर्जन तिथि, अनुष्ठान, मंत्र और ज्योतिषीय महत्व के बारे में जानें। अभी पढ़ें।...