भगवान श्री राम की ये निशानियां आज भी हैं मौजूद

आज भी मौजूद हैं भगवान राम की ये निशानियां

भगवान राम और रामायण के कई सारे सबूत हमारे सामने मौजूद हैं। भगवान राम आज भारत में अपने राम मंदिर को लेके अदालत में लड़ते हुए बेशक नजर आ रहे हैं लेकिन इसके बावजूद भी हमारे सामने इस तरीके के कई सारे सबूत मौजूद हैं जो यह साबित करते हैं कि भगवान राम और रामायण दोनों ही सही थे।
रामायण और राम किसी भी तरीके की कोई मिथ्या कहानी नहीं है इस बात को साबित करने के लिए आज हम आपके सामने कुछ सबूत पेश करने वाले हैं:

रामायण में मौजूद हैं श्री राम का पूरा वृतांत

रामायण में ऐसे 8 स्थानों का जिक्र किया गया है जहां पर राम ने अपने दिन गुजारे थे और आज भी यह स्थान पृथ्वी पर भारत के अंदर मौजूद हैं जो यह बात साबित करती है कि भगवान राम और रामायण दोनों ही सही है।

अयोध्या - भगवान श्री राम की जन्मभूमि

रामायण में इस बात का जिक्र है कि अयोध्या में भगवान राम का जन्म हुआ था, रामायण काल से ही अयोध्या कौशल साम्राज्य की राजधानी बताई गई है। राम का जन्म रामकोट अयोध्या के दक्षिण भाग में हुआ था। अयोध्या वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश के अंदर है राम के हजारों भक्त यहां पर दर्शन करने आते हैं।

यहाँ किया था सीता, राम और लक्ष्मण ने विश्राम

प्रयाग वह जगह है जहां पर राम, लक्ष्मण और सीता ने 14 साल के वनवास के लिए जाते समय पहली बार विश्राम किया था। वर्तमान समय में यह स्थान इलाहाबाद के नाम से जाना जाता है। इस स्थान का जिक्र ना सिर्फ रामायण बल्कि महाभारत और पुराणों में भी किया गया है।

यह स्थान रहा श्री राम के वनवास का हिस्सा

वनवास के समय भगवान श्रीराम ने 11 साल चित्रकूट में ही बिताए थे। यह चित्रकूट भी भारत में आज पर्यटन का और भक्ति का एक प्रमुख स्थान माना जाता है। वर्तमान समय में चित्रकूट मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच में स्थित है, यहां पर भगवान श्री राम के कई सारे मंदिर मौजूद हैं।

आज भी मौजूद हैं राम सेतु

रामेश्वरम वह जगह है जहां पर हनुमान जी की सेना ने लंकापति रावण तक पहुंचने के लिए राम सेतु का निर्माण किया था। वर्तमान में को सेटेलाइट की मदद से लिए गए फोटो में देखा गया है इस पुल की लंबाई लगभग 30 मील 48 किलोमीटर है। रामेश्वरम दक्षिण जबकि तमिलनाडु में स्थित है।

यहाँ हुई श्री राम और हनुमान जी की पहली मुलाकात

किष्किंधा वह स्थान है जहां पर भगवान राम की मुलाकात हनुमान जी से हुई थी और सुग्रीव और बाली अध्याय का जिक्र किष्किंधा में ही है। कर्नाटक के अंदर वैलोरी और कोपल के आसपास किष्किंधा मौजूद है। किष्किंधा के नाम से रामायण में पूरा एक अध्याय भी लिखा गया है।

तो यह स्थान साबित करते हैं कि भगवान राम और रामायण दोनों ही तथ्यों के आधार पर सही साबित होती है और भगवान राम और रामायण के अस्तित्व को आप नकार नहीं सकते हैं।
अपनी कुंडली के सटीक भविष्यवाणी जानने के लिए अभी परामर्श करे हमारे प्रसिद्ध ज्योतिषियों से।

यह भी पढ़े:

हनुमान जी का जन्म स्थान | बजरंगबली के इन 12 नामों के जप करने से लाभ और फायदे | रामेश्वर मंदिर की पूरी कथा


Recently Added Articles
Saptahik Rashifal - साप्ताहिक राशिफल 11 अक्टूबर से 17 अक्टूबर 2021
Saptahik Rashifal - साप्ताहिक राशिफल 11 अक्टूबर से 17 अक्टूबर 2021

इस सप्ताह मेष राशि में ग्रहों का निरीक्षण किया जाए तो चंद्रमा सिंह राशी में बहुत मजबूत होकर के विराजमान है। बृहस्पति और शनि की स्थिति कर्म स्थान में ह...

फेस रीडिंग एस्ट्रोलॉजी (Face Reading) - चेहरे से जाने आपका व्यक्तित्व और भविष्य
फेस रीडिंग एस्ट्रोलॉजी (Face Reading) - चेहरे से जाने आपका व्यक्तित्व और भविष्य

जिस तरह हथेली पर बनी रेखायों को देख कर व्यक्ति के भविष्य और स्वभाव के बारे में जाना जा सकता है कुछ उसी तरह आपका चेहरा भी आपके भाग्य और व्यक्तित्व के ब...

Saptahik Rashifal - साप्ताहिक राशिफल (20 से 26 सितम्बर) 2021, जानिए इस हफ्ते सितारों की चाल
Saptahik Rashifal - साप्ताहिक राशिफल (20 से 26 सितम्बर) 2021, जानिए इस हफ्ते सितारों की चाल

साप्ताहिक राशिफल के अनुसार, यह सप्ताह आपकी राशी  में चंद्रमा शुक्र के साथ में द्वितीय घर में है जो की बहुत ही अच्छी स्थिति है निश्चित कह सकते हैं...

Saptahik Rashifal 2021 - सप्ताहिक राशिफल 2021 (13 से 20 सितम्बर)
Saptahik Rashifal 2021 - सप्ताहिक राशिफल 2021 (13 से 20 सितम्बर)

मेष राशि सप्ताहिक राशिफल (Mesh Rashi Saptahik Rashifal) के अनुसार आपका राशि स्वामी मंगल आपकी राशि से छठे स्थान पर बुध के साथ में अति शत्रु घर में है।...