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रामेश्वर मंदिर - हनुमान की सहायता से भगवान राम ने की ज्योतिर्लिंग की स्थापना 

कलयुग के देवता श्री हनुमान जी भगवान राम के परम भक्त हैं। जिन्होंने संकट के समय में भगवान राम का साथ निभाना और माता सीता का पता लगाया। माता सीता का पता चलने पर सभी ने भगवान राम की आज्ञा से निश्चय किया कि समुंदर पार लंका जाएंगे। लेकिन समस्या यहां थी समुद्र को पार कैसे किया जाएगा। जिसके बाद उपाय ढूंढकर भगवान राम की आज्ञा पाकर सभी ने पत्थरों से सेतु का निर्माण किया। सभी वानरों ने राम पत्थर पर लिखकर समुद्र के ऊपर-ऊपर पुल बना दिया था और लंका पहुंचकर वहां विजय प्राप्त की। लौटते वक्त इसी जगह ज्योतिर्लिंग की स्थापना की। जिसके पीछे कारण रहा कि लंका में हुए सभी पापों का प्रायश्चित हो सके। सीता और लक्ष्मण जी के साथ मिलकर श्री राम जी ने हनुमान की सहायता से ज्योतिर्लिंग की स्थापना करते हुए भगवान शिव को याद किया। तब से यहां इस ज्योतिर्लिंग का नाम रामेश्वर रख दिया गया। रामेश्वर का अर्थ है राम के ईश्वर। इस पवित्र स्थान के बारें में आपको जानकर खुशी होगीं कि स्थान कितना खास है। 

आइए जानते हैं रामेश्वर मंदिर की पूरी कथा (Rameshwaram temple history in hindi)

रामेश्वर चारों तीर्थ धाम में से एक तीर्थ धाम है। जो रामेश्वरम मन्दिर के नाम से पुकारा जाता है। श्री रामेश्वर मंदिर बेहद विशाल है। जो 1000 फुट लंबा, 650 फुट चौड़ा और 100 फुट ऊंचा है। इस मंदिर में भगवान शिव के लिंग मूर्ति की स्थापना की गई है। यह वह पवित्र स्थान है जो रामनाथपुरम जिले में है। रामेश्वर धाम के लिए गंगोत्री से जलाकर भगवान शिव को अर्पित किया जाता है। जिसका अपना एक अलग महत्व है। भगवान की दिव्य शक्ति इस मंदिर में दौगुनी है, क्योंकि इसमें एक नहीं बल्कि दो शक्तियों का वास है। 

लंका से लौटते वक्त रामेश्वर में श्री राम ने हनुमान को आज्ञा दी कि एक बड़ी शिवलिंग लेकर आए, लेकिन उन्हें आने में देर होने पर माता सीता ने अपने हाथों से एक छोटी शिवलिंग की स्थापना की। जिसके बाद हनुमान जी के आने पर बड़े काले रंग की शिवलिंग की स्थापना भी की गई और दोनों शिवलिंग की पूजा की जाने लगी। आज भी ज्योतिर्लिंग के रूप में शिवलिंग की पूजा की जाती है और राम नाथ जी का प्रसिद्ध मंदिर टापू की छोर पर है। साथ ही दक्षिण कोने में धनुष्कोटी नाम का भी तीर्थ स्थान है जो हिंद महासागर में बंगाल की खाड़ी से मिलता है। इसलिए भक्तजन दोनों धामों पर जाते हैं और भगवान मिलने का मौका पातें है। इस पवित्र शक्तिशाली मंदिर में जो एक बार जाता है वो बार-बार जाना चाहता है और कहा जाता है कि रामेश्वर धाम की यात्रा से सभी पाप नष्ट हो जाते है। साथ ही यहां आने वाले श्रद्धालुओं को भगवान् शिव के शिवालय में स्थान भी मिलता है। जो श्रीराम के दिवाने है उन्हें यहां जरूर जाना चाहिए क्योंकि यहीं वो जगह जहां हर समय श्रीराम के नाम का गुणगान होता रहता है।

रामेश्वर मंदिर की मान्यता

श्री राम भगवान द्वारा स्थापित ज्योतिर्लिंग का पवित्र गंगा जल से जलाभिषेक करने से सभी मनोकामनाओ की प्राप्ति होती हैं।  सबसे बड़ी मान्यता तो यह हैं की रामेश्वरम मंदिर के दर्शन और पूजा मात्र से ब्रह्महत्या जैसे दोष से मुक्ति मिल जाती हैं। रामेश्वर मंदिर भगवन शिव और श्री राम की कृपा से भरा हुआ हैं और भारत का दूसरे काशी के नाम से जाना जाता हैं।

रामेश्वरम मंदिर के मुख्य तीन आकर्षण

राम सेतु - आदम ब्रिज को ही राम सेतु के नाम से जाना जाता हैं। इसकी लम्बाई लगभग 48 किलोमीटर की हैं। इसका निर्माण वानर सेना द्वारा लंका तक पहुंचने और उस पर विजय प्राप्त करने के लिए किया गया था।  परन्तु जब श्री राम ने रावण का वध करके विभीषण को सिंहासन सौंप दिया था तब विभीषण के कहने पर इस सेतु को तोड़ दिया गया। आज भी इसके अवशेष यह देखने को मिल जाते हैं। 

दैविक 24 कुएं - श्री राम के अमोघ बाण से बने ये 24 दैविक कुएं रामेश्वर तीर्थ के मुख्य आकर्षणों में से एक हैं।  इन कुओं का जल बहुत मीठा हैं।  ये सभी कुएं देशभर में विख्यात हैं।

रामेश्वर मंदिर - रामेश्वर मंदिर वास्तु की दृष्टि से बहुत अद्भुत है। रामेश्वरम का गलियारा दुनिया का सबसे बड़ा गलियारा हैं। इसकी खूबसूरती देखते ही बनती हैं।

 

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