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भारत की संस्कृति सबसे अनोखी और निराली मानी जाती है, यहां श्रद्धा भक्ति और विश्वास का जवाब नहीं है। भारत में पेड़-पौधों से लेकर जानवरों तक की पूजा पाठ की जाती है। यहां देवी-देवताओं के साथ उनके वाहनों और अन्य जीवों को भी पूजा जाता है। क्या आप जानते हैं कि भारत में ऐसा भी मंदिर है जहां पर मेंढक की पूजा की जाती है। यह बात हकीकत में दंग करने वाली है कि मेंढक का भी मंदिर होता है। चलिए हम आपको बताते हैं कि मेंढक का अजूबा मंदिर कहां पर है?
ऐसे अद्भुत धार्मिक स्थलों को लेकर कई लोग अपनी आस्था और ग्रह स्थिति को समझने के लिए online kundali in hindi का सहारा लेते हैं।
यह मंदिर उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के गोयल कस्बे में है। गोयल में बना ये मंदिर भारत का इकलौता ऐसा मंदिर है, जहां पर देवी-देवता के मेंढ़क का पूजन किया जाता है। दरअसल, माना गया है कि ओयल शैव संप्रदाय का प्रमुख केंद्रऔर यहां के शासक शिव के उपासक थे। जिन्होंने यहां पर राज किया था वे भगवान शिव को अपना परम गुरु और देव मानते थे। जो भगवान शंकर की पूजा-अर्चना और आराधना किया करते थे। यही कारण है कि इस कस्बे के बीच मंडूक यंत्र पर आधारित भगवान शंकर का मंदिर बना हुआ है।
astrology in Hindi के अनुसार, मंडूक यंत्र जैसे तांत्रिक प्रतीक प्रकृति और ग्रह तत्वों से गहरे रूप से जुड़े माने जाते हैं।
दरअसल, ये मंदिर सदियों पुराना है और यहां पर 11वीं सदी से 19 वीं सदी तक चाहमान शासकों ने राज किया, चाहमान वंश के राजा बख्श सिंह ने अनूठे मंदिर को बनवाया था। कहा जाता है कि मंदिर की वास्तु परिकल्पना कपिला की एक महान तांत्रिक द्वारा कराई गई। मंदिर एक विशेष ढांचे की तरह बनवाया गया ताकि सबसे अलग मंदिर दिखे और मंदिर में भगवान शंकर के शिवलिंग की स्थापना की गई।
मेंढक मंदिर बड़े ही अलग ढंग से बनाया गया है, आर्किटेक्चर ने कला का परिचय दिया। मंदिर में बड़ा- सा मेंढक बना हुआ है, जो देखने में बड़ा ही अद्भुत और विचित्र लगता है। दिखने पर प्रतीत होता है जैसे मेढ़क ने अपनी पीठ पर पूरे मंदिर को संभाला हो। यहां पर शंकर के शिवलिंग का पूजन किया जाता है।
लखीमपुर खीरी में स्थित में का मंदिर लगभग 200 साल पुराना है, जो कि प्राकृतिक आपदाओं से बचाने के लिए बनवाया गया था। मेंढक मंदिर में रखी बड़ी विचित्र और शक्तिशाली है। यह शिवलिंग अपना रंग बदलती है। मेढ़क मंदिर में स्थित चमत्कारी शिवलिंग को देखने के लिए लोग यहां दूर-दूर से आते हैं और हर दीपावली और महाशिवरात्रि पर मंदिर का नजारा देखने लायक होता है। यहां पर हर मनोकामना को पूर्ण किया जाता है।
मेंढक मंदिर की एक और विशेषता यह भी है कि यहां पर नंदी भगवान शंकर की सवारी है जो बैठी हुई रूप में नहीं बल्कि खड़े हुए रूप में स्थापित है। आज तक अपने हर जगह नंदी केवल बैठे हुए रूप में देखे होंगे लेकिन यह एक ऐसा मंदिर है जहां पर नंदी की मूर्ति खड़ी रहती है। कहा जाता है कि नंदी भगवान शंकर की शिवलिंग की रक्षा करते हैं और भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करते हैं।
यदि आप भी चाहते हैं इस अनोखे मंदिर को देखना तो उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में जरूर जाएं एक नहीं बल्कि कई चमत्कार देख कर आए।
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