>
पहाड़ों में स्थित अधिकतर मंदिरों के खुलने और बंद होने का समय मौसम की परिस्थितियों को देखते हुए पहले से निर्धारित किया जाता है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु कठिन यात्राओं के बावजूद इन पवित्र धामों की यात्रा करते हैं। कितनी भी बड़ी आपदा या तबाही आ जाए, लेकिन जिनका भगवान शंकर पर अटूट विश्वास होता है, उनका भरोसा कभी कम नहीं होता और भगवान शंकर अपने भक्तों का सदैव उद्धार करते हैं। मंदिर के कपाट खुलने के समय की बात करें तो सर्दियों की कठोरता के कारण लगभग 6 महीने के लिए मंदिर बंद कर दिए जाते हैं। दिवाली के बाद कपाट बंद होते हैं और फिर अप्रैल–मई के शुभ काल में श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के द्वार खोले जाते हैं। कई भक्त अपनी यात्रा की योजना ज्योतिष परामर्श के आधार पर शुभ मुहूर्त देखकर बनाते हैं, ताकि दर्शन और यात्रा दोनों ही मंगलमय और सुरक्षित रहें।
आओ <spanपहाड़ों में स्थित अधिकतर मंदिरों के खुलने और बंद होने का समय मौसम की परिस्थितियों को देखते हुए पहले से निर्धारित किया जाता है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु कठिन यात्राओं के बावजूद इन पवित्र धामों की यात्रा करते हैं। कितनी भी बड़ी आपदा या तबाही आ जाए, लेकिन जिनका भगवान शंकर पर अटूट विश्वास होता है, उनका भरोसा कभी कम नहीं होता और भगवान शंकर अपने भक्तों का सदैव उद्धार करते हैं। मंदिर के कपाट खुलने के समय की बात करें तो सर्दियों की कठोरता के कारण लगभग 6 महीने के लिए मंदिर बंद कर दिए जाते हैं। दिवाली के बाद कपाट बंद होते हैं और फिर अप्रैल–मई के शुभ काल में श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के द्वार खोले जाते हैं। कई भक्त अपनी यात्रा की योजना ज्योतिष परामर्श के आधार पर शुभ मुहूर्त देखकर बनाते हैं, ताकि दर्शन और यात्रा दोनों ही मंगलमय और सुरक्षित रहें।-size: 12.5pt; font-family: 'Mangal','serif'; mso-ansi-language: EN-IN; mso-fareast-language: ZH-CN; mso-bidi-language: HI;">चले केदारनाथ....तबाही के बाद भी विश्वास का प्रतीक का धाम है केदारनाथ
आपको याद होगा वह पल जब प्रकृति का तांडव देखकर हर कोई हैरान था। जो प्रकृति का वह भयानक रूप था। जिसे देखकर हर किसी की रूह कांप उठी थी। जी हां, हम बात कर रहे हैं उस प्रलय की जिसने लाखों जिंदगियों को मौत के घाट उतार दिया। हम उसी प्रलय की बात कर रहे हैं जो उत्तराखंड में 2013 में आई थी। जिसमें सबसे ज्यादा क्षति केदारधाम में हुई थी।
भगवान के दर्शन के लिए लोग खुशी-खुशी आते हैं, लेकिन तबाही का वह वक्त भक्तों के लिए ऐसी मुसीबत बन गया कि कुछ समय के लिए लोगों का भगवान पर से विश्वास डगमगाने लगा। केदारनाथ में आई भयानक बाढ़ ने वहां का चप्पा-चप्पा गंगा की गोद में समा दिया था। लेकिन इन सबके बीच सबसे चौंकाने वाली बात केदारनाथ मंदिर को लेकर रही, क्योंकि इतनी भीषण आपदा के बाद भी मंदिर को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ। यह तबाही इतनी भयावह थी कि उसे भूल पाना नामुमकिन है। प्रकृति का ऐसा रौद्र रूप देखकर यही लगता था कि अब कुछ भी शेष नहीं बचेगा, लेकिन फिर भी भोलेनाथ का केदारनाथ मंदिर अडिग खड़ा रहा। Astrology in Hindi के अनुसार इसे केवल संयोग नहीं माना जाता, बल्कि इसे भगवान शिव की दिव्य ऊर्जा, ग्रहों के विशेष योग और आध्यात्मिक शक्तियों से जुड़ा चमत्कार बताया जाता है। इन घटनाओं के बाद लोगों का भोलेनाथ और केदारनाथ मंदिर के प्रति विश्वास और भी गहरा हो गया। चलिए आज हम आपको केदारनाथ मंदिर से जुड़ी उन्हीं रहस्यमयी शक्तियों और चमत्कारों के बारे में बताते हैं।
भगवान शंकर का यह पवित्र मंदिर गिरिजा हिमालय की केदार नामक चोटी पर स्थित है। भगवान भोलेनाथ के बारह ज्योतिर्लिंगों में यह केदारेश्वर ज्योतिर्लिंग सबसे प्रमुख स्थान रखता है। यह पावन स्थल तीनों तरफ से ऊँचे-ऊँचे पर्वतों से घिरा हुआ है। एक ओर लगभग 22,000 फुट ऊँचा केदारनाथ पर्वत, दूसरी ओर 21,000 फुट ऊँचा खर्चकुंड और तीसरी ओर लगभग 22,000 फुट ऊँचा भरतकुंड पर्वत स्थित है। ऐसी मान्यता है कि जिस प्रकार Online kundli in hindi के माध्यम से व्यक्ति के जीवन की दिशा और भाग्य का ज्ञान होता है, उसी तरह यह दिव्य स्थान भी भक्तों को आध्यात्मिक मार्ग और जीवन के रहस्यों से जोड़ता है।
केदारनाथ मंदिर इतना विशाल है कि यह 85 फुट ऊंचा 187 फुट लंबा और 80 फुट चौड़ा है। इसकी मजबूत दीवारें पर्वत से बनाई गई है। पहाड़ों में मंदिर का बनना अपने आप में एक आश्चर्यजनक बात है... इसलिए ये मंदिर विश्वास और भक्ति का प्रतीक होते हैं। वरना जहां पर्वतों का गिरना कभी कम नहीं होता वहां मंदिर का होना शक्ति का ही उदाहरण है।
मंदिर की प्राचीनता का अंदाजा इसकी दीवारों से ही लगाया जा सकता है। माना जाता है कि यह मंदिर हजारों साल पुराना है और तभी से लगातार यहाँ तीर्थ यात्रा जारी है। ग्रंथों में वर्णित है कि भगवान विष्णु के अवतार नर और नारायण ने इसी पर्वत पर कठोर तपस्या की थी और उनका एकमात्र उद्देश्य भगवान शंकर के दर्शन करना था। उनकी कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए। जब वर माँगने को कहा गया तो नर और नारायण ऋषि ने पिंडी रूप में शिव के वहीं निवास करने की प्रार्थना की। भगवान ने उनकी इच्छा स्वीकार की और तभी से यहाँ ज्योतिर्लिंग स्वरूप में निवास करते हैं। मंदिर का निर्माण महाभारत काल में कराया गया माना जाता है। बाद में यह मंदिर समय के साथ लुप्त हो गया, जिसके पश्चात् आदि शंकराचार्य ने इसका पुनर्निर्माण कराया। कई वर्षों तक पर्वत पर बर्फ जमी रहने के कारण मंदिर ढका रहा, लेकिन 12वीं और 13वीं सदी में राहुल सांकृत्यायन द्वारा इसके प्रमाण दिए गए और पुनः यात्रा आरंभ हुई। जिस प्रकार कुंडली मिलान के माध्यम से प्राचीन शास्त्रों के आधार पर जीवन के गूढ़ रहस्यों को समझा जाता है, उसी तरह इस मंदिर का इतिहास भी काल, कर्म और आस्था के अद्भुत मेल को दर्शाता है।
पहाड़ों में स्थित अधिकतर मंदिरों के खुलने और बंद होने का समय मौसम की परिस्थितियों को देखते हुए पहले से निर्धारित किया जाता है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु कठिन यात्राओं के बावजूद इन पवित्र धामों की यात्रा करते हैं। कितनी भी बड़ी आपदा या तबाही आ जाए, लेकिन जिनका भगवान शंकर पर अटूट विश्वास होता है, उनका भरोसा कभी कम नहीं होता और भगवान शंकर अपने भक्तों का सदैव उद्धार करते हैं। मंदिर के कपाट खुलने के समय की बात करें तो सर्दियों की कठोरता के कारण लगभग 6 महीने के लिए मंदिर बंद कर दिए जाते हैं। दिवाली के बाद कपाट बंद होते हैं और फिर अप्रैल–मई के शुभ काल में श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के द्वार खोले जाते हैं। कई भक्त अपनी यात्रा की योजना ज्योतिष परामर्श के आधार पर शुभ मुहूर्त देखकर बनाते हैं, ताकि दर्शन और यात्रा दोनों ही मंगलमय और सुरक्षित रहें।
Nadi Dosh Kya Hota Hai यह शादी और कुंडली मिलान में क्यों जरूरी है, जानें इसके प्रभाव, पहचान के तरीके और ज्योतिष अनुसार आसान समाधान।...
कुंडली में नाड़ी दोष कैसे बनता है, इसका असर क्या होता है और सही उपाय क्या हैं। Vedic Expert से Free, Accurate और Trusted रिपोर्ट, Instant Solution के ...
Nadi Dosh Ke Upay जानें। कब दोष लगता है, कब खत्म होता है और शादी पर असर क्या पड़ता है — एक्सपर्ट गाइड 2026 में पढ़ें।...