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जानिये कब है 2026 में योगिनी एकादशी और क्या है इसका महत्व

हिंदू पंचांग के अनुसार, योगिनी एकादशी कृष्ण पक्ष के दौरान आषाढ़ के महीने में आती है, जो कि चंद्रमा का चरण है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार, यह जून या जुलाई के महीने में पड़ती है। यह व्रत किसी भी युवा या वृद्ध व्यक्ति, जो किसी भी प्रकार की बीमारी या स्वास्थ्य समस्याओं से बचना चाहते हैं, द्वारा रखा जा सकता है। यह उपवास विशेष रूप से उन लोगों द्वारा मनाया जाना महत्वपूर्ण है जो कुष्ठ रोग सहित त्वचा संबंधी किसी भी समस्या से पीड़ित हैं। अन्य कई एकादशी व्रत की तरह यह व्रत काफी फलदायक है और पिछले सभी पापों और बुरे कर्मों को दूर करता है और अच्छा स्वास्थ्य प्रदान करता है। ऐसे धार्मिक व्रत वैदिक ज्योतिष के अनुसार भी स्वास्थ्य सुधार और मानसिक शांति प्रदान करने वाले माने जाते हैं।

कैसे करे योगिनी एकादशी 2026 व्रत (How to do Yogini Ekadashi 2026 Vrat)

यदि व्रत और पूजा का सख्ती से पालन किया जाए तो योगिनी एकादशी का व्यक्ति के जीवन पर बहुत प्रभाव पड़ता है। अन्य एकादशी व्रत की तरह उपवास सूर्योदय से शुरू होता है और अगले दिन सूर्योदय तक जारी रहता है। व्रत का पालन करने वाले व्यक्ति को गेहूं, जौ या चावल जैसे अनाज या अनाज का सेवन नहीं करना चाहिए। साथ ही बिना नमक वाला खाना बनाया जाना चाहिए। योगिनी एकादशी के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए। यह भी महत्वपूर्ण है कि व्यक्ति दिन भर स्वच्छ रहे और भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करे। व्रत की माँग के अनुसार, भक्त को रात भर जागना चाहिए और भगवान विष्णु से अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करनी चाहिए। यदि आप अपने जीवन में किसी विशेष समस्या या परेशानी का समाधान चाहते हैं, तो इस व्रत के साथ विशेषज्ञ ज्योतिष परामर्श भी अत्यंत लाभकारी माना जाता है।

कब है 2026 में योगिनी एकादशी (When is Yogini Ekadashi in 2026)

जैसा कि आपको हम ऊपर बता चुके है कि यह एकादशी बहुत महत्वपूर्ण है उन सभी के लिए जो पीड़ित होते है। इस कारण उन्हें तिथि और शुभ मुहूर्त का भी ध्यान रखना चाहिए। 

योगिनी एकादशी 2026: तारीख और पारणा मुहूर्त

योगिनी एकादशी 2026 09 जून, मंगलवार को पड़ने वाली है।

योगिनी एकादशी पारणा का शुभ मुहूर्त:

पारणा की तिथि: 10 जून 2026, बुधवार

पारणा का शुभ मुहूर्त: सुबह 05:26 से सुबह 08:13 तक

अवधि: 2 घंटे 47 मिनट

यह जानकारी योगिनी एकादशी के व्रत को सही समय पर खोलने के लिए महत्वपूर्ण है। यदि आप जानना चाहते हैं कि यह व्रत आपकी व्यक्तिगत कुंडली पर क्या प्रभाव डालेगा, तो विशेषज्ञ से मेरा जन्म कुंडली बताओ सेवा के माध्यम से जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

योगिनी एकादशी 2026 व्रत का अनुष्ठान भी जान लीजिए (Yogini Ekadashi 2026 Vrat)

1) योगिनी एकादशी की पूजा और व्रत हिंदू कैलेंडर के दसवें दिन से हिंदू कैलेंडर के बारहवें दिन तक होता है। भक्त को सकारात्मक सोचना चाहिए और भगवान विष्णु को भगवान की तस्वीर या मूर्ति पर फूल और मिठाई अर्पित करते हुए कल्याण की प्रार्थना करनी चाहिए।

2) भगवान को अर्पित करने के लिए अन्य पूजा की चीजें जैसे अगरबत्ती, दीपक, पानी के पात्र और बेल को एक थाली में रखा जाना चाहिए। तुलसी के पत्तों को पिछले दिन खरीदना चाहिए, ताकि एकादशी के दिन इसे चढ़ाना न पड़े।

3) परिवार के अन्य सदस्य भी पूजा में शामिल हो सकते हैं, भले ही वे उपवास न कर रहे हों और परिवार के स्वास्थ्य और खुशी के लिए जोर-जोर से भजन और आरती गाते हों।

4) पूजा समाप्त होने के बाद प्रसाद सभी को बाँट दी जानी चाहिए। प्रसाद में मिठाई या फल शामिल जरूर होने चाहिए।

5) व्रत के पालनकर्ता को अनाज और नमक के बिना भोजन करने से बचना चाहिए। साथ ही उन्हें बार-बार पानी पीने से भी बचना चाहिए।

6) अगले दिन, सूर्योदय के दौरान भक्त भगवान को प्रसाद चढ़ानी चाहिए और दीपक जलाना चाहिए। साथ ही प्रसाद को सभी में बांटना चाहिए फिर व्रत को तोड़ना शुभ माना जाता है।

इस शुभ दिन पर दांपत्य जीवन में समस्याओं का समाधान पाने के लिए कई लोग कुंडली मिलान भी करवाते हैं, ताकि ग्रहों की अनुकूलता से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति आए।

योगिनी एकादशी 2026 व्रत तिथि (Yogini Ekadashi 2026 Vrat Date)

योगिनी एकादशी तिथि - 09 जून 2026

पारणा का शुभ मुहूर्त: सुबह 05:26 से सुबह 08:13 तक

योगिनी एकादशी 2026 व्रतकथा (Yogini Ekadashi 2026 Vrath Katha)

प्राचीन काल में अलकापुरी नामक नगर में एक कुबेर नाम का राजा रहता था जिसके यहां हेम नमक माली काम किया करता था। उसका काम रोजाना भगवान शंकर के पूजन के लिए मानसरोवर से फूल लाना था। एक दिन उसे अपनी पत्नी के काम  के कारन फूल लेन में देरी हो गयी और वह दरबार में देरी से आया। जिसके कारन वश राजा ने उसे कोढ़ी श्राप दे दिया।  श्राप मिलने पर माली यहाँ वहाँ भटकता रहा और एक दिन दैवयोग से मार्कण्डेय ऋषि के आश्रम में जा पहुंचा। मार्कण्डेय ऋषि ने अपनी योग शक्ति से उसके दुःख का कारण समझ लिया। तब मार्कण्डेय ऋषि ने उस माली को योगिनी एकादशी का व्रत करने को कहा।  व्रत के प्रभाव से हेम माली का कोढ़ समाप्त हो गया और उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई। 

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