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सोमनाथ मंदिर का इतिहास (Somnath Temple History)

गुजरात के पश्चिमी तट पर सौराष्ट्र में वेरावल के पास प्रभास पाटन में स्थित सोमनाथ मंदिर, शिव के बारह ज्योतिर्लिंग मंदिरों में से पहला माना जाता है। यह गुजरात का एक महत्वपूर्ण तीर्थ और पर्यटन स्थल है जहां हजारों श्रद्धालु रोजाना दर्शन करने के लिए आते है। बता दें कि भगवान शिव के इस ज्योतिर्लिंग मंदिर पर कई बार मुस्लिम आक्रमणकारियों और शासकों के साथ-साथ पुर्तगालियों ने हमला किया था और बार-बार पुनर्निर्माण किया गया। वर्तमान में मंदिर को हिंदू मंदिर की चौलुक शैली में फिर से बनाया गया है। 

जानकारी के लिए आपको बता दें कि चैत्र, भाद्रपद, कार्तिक माह में यहां श्राद्ध करने का विशेष महत्व बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि इन तीन महीनों में श्रद्धालुओं की बडी भीड़ लगी रहती है। साथ ही यहां तीन नदियों हिरण, कपिला और सरस्वती का महासंगम भी होता है। इस कारण त्रिवेणी स्नान का विशेष महत्व माना जाता है। 

वहीं अगर हम ज्योतिर्लिंग के बारे में और बात करें तो सोमनाथ का शिवलिंग भारत के उन 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है, जहाँ शिव को प्रकाश के एक उग्र स्तंभ के रूप में प्रकट किया गया है। ज्योतिर्लिंगों को सर्वोच्च, अविभाजित वास्तविकता के रूप में लिया जाता है जिसमें से आंशिक रूप से शिव प्रकट होते हैं। 

12 ज्योतिर्लिंग स्थलों में से प्रत्येक में भगवान शिव का अलग-अलग नाम है। इन सभी स्थलों पर, प्राथमिक छवि एक लिंगम है जो शिव की अनंत प्रकृति का प्रतीक है। 

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर का इतिहास

त्रिवेणी संगम (तीन नदियों: कपिला, हिरन और सरस्वती का संगम) होने के कारण सोमनाथ का स्थान प्राचीन काल से एक तीर्थ स्थल रहा है। माना जाता है कि चंद्र देवता को सोम को श्राप देने के कारण अपनी चमक खोनी पड़ी थी और फिर उन्हें इसे पुनः प्राप्त करने के लिए इस स्थल पर सरस्वती नदी में स्नान किया। 

क्यों हैं सोमनाथ मंदिर की धार्मिक मान्यता वहीं अगर हम सोमनाथ   

ज्योतिर्लिंग के धार्मिक मान्यता के बारे में बात करें तो सोमनाथ भगवान की पूजा और उपासना करने से भक्तजनों के क्षय तथा कोढ़ आदि रोग हमेशा के लिए नष्ट हो जाते हैं और वह स्वस्थ हो जाता है। इस कारण यहाँ अनेकों लोग सुख शांति के लिए आते है और पूजा पाठ करते है। यहाँ एक लोकप्रिय चन्द्रकुण्ड है। 

साथ ही ऐसा माना जाता है कि मंदिर में आज भी भगवान शिव और ब्रह्मा निवास करते हैं। बता दें कि यह कुंड पाप का नाश करने वाले के रूप में प्रसिद्ध है। इस कारण इसे ‘पापनाशक-तीर्थ’ भी कहा जाता हैं।  

ऐसा माना जाता है कि जो भक्त इस चन्द्रकुण्ड में स्नान करते है, उनका पाप हमेशा के लिए मिट जाता है। मतलब जिन्होंने कोई पाप किया है तो उन्हें यहाँ अवश्य जाना चाहिए।

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने के लिए कैसे पहुँचे

यदि आप इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन के बारे में सोच रहे है तो आपको पता होना चाहिए कि इसके आसपास रेलवे स्टेशन या एयरपोर्ट है या नहीं। तो जानकारी के लिए आपको बता दें कि इस ज्योतिर्लिंग के सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन वेरावल है। जबकि निकटतम हवाई अड्डा दीव, राजकोट, अहमदाबाद, वड़ोदरा है। मतलब आप आसानी से इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर सकते है।

 

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर का अंग्रेजी अनुवाद पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

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