हिन्दू धर्म

हिन्दू धर्म से जुडी वो 5 बातें जो साबित करती हैं हिन्दू धर्म से बढ़कर कोई धर्म नहीं

आपने सुना होगा कि हिन्दू धर्म से बढ़कर कोई धर्म नहीं है। यह सबसे प्राचीन धर्म है, इसकी शुरुआत मनु ऋषि ने की थी लेकिन इसकी महिमा का वर्णन आज तक कोई ऋषि संपूर्ण तरीके से नहीं कर पाया यानी कि ये वो धर्म है जो सब धर्मों से अलग है। जिसकी मान्यता सब धर्मों से निराली है। आज हम आपको इस धर्म की कुछ ऐसी बातें बताएंगे जिन्हें जानकर आपको आश्चर्य होगा कि हिन्दू धर्म वाकई नहीं कितना महान है।

दरअसल, हिन्दू धर्म में कर्तव्य, कर्म, संस्कार, भाव, इंसानियत, निष्ठा, वचन और सद्भावना सब कुछ है। इस धर्म में अनेकों धर्मात्मा और परमात्मा के गुण मिले हुए हैं। आपको बता दें कि हिन्दू धर्म यह ऐसा धर्म है जिसमें हजारों करोड़ों की संख्या में ऋषि मुनि रहें। जिन्होंने राजा-महाराजाओं को ज्ञान देकर भारत को महान बनाया। इसी धर्म में अनेकों गुरुओं ने गुरुकुल जैसी पवित्र पाठशाला का निर्माण किया। जिससे कि ऐसा ज्ञान पैदा हुआ जिसका वर्णन करना भी आसान नहीं है। आपको बता दें कि इस धर्म में 5 ऐसी बातें हैं जो हर किसी को एक बड़ी सीख देती है।

परमात्मा से मिलन

शक्ति का आरंभ तब होता है, जब आत्मा से परमात्मा का मिलन हो जाए। कुछ इसी ही हिन्दू धर्म में जब मनुष्य परमात्मा से लगन लगा लेता है तो उसके अंदर एक शक्ति उत्पन्न हो जाती है, जिससे किसी भी बुराई को मारा जा सकता है। जो भगवान के चरणों में खो गया तो उसका जीवन धन्य हो गया। ऐसे अनेकों उदाहरण है राजस्थान की मीरा बाई हो या कबीर सिंह जिन्होंने अपने दोहे से सभी का मन मोह लिया।

वेद और उनका वर्णन

हिन्दू धर्म में वेदों का वर्णन चारों वेद अलग ही महत्व रखते हैं। यदि मनुष्य सामवेद, अर्थववेद, यजुर्वेद और ऋग्वेद में एक भी वेद का वर्णन पढ़ ले तो वो ज्ञानी कहलाता है। बड़े-बड़े ऋषि मुनियों ने वेदों का ज्ञान प्राप्त करके शिक्षा को प्राप्त किया है। हिन्दू धर्म में शिक्षा की देवी मां सरस्वती जिन पर भी खुश होती हैं उसी को ही बुद्धि का भंडार भर देती है।

स्वतंत्रता और संस्कार

स्वतंत्रता हिन्दू धर्म में बहुत मायने रखती है, स्वतंत्रता के आगे यहां कुछ नहीं यानी कि यदि आप चाहते हैं कि आप मंदिर में जाएं और भगवान का भजन करें या भगवान के नाम का व्रत रखें तो इसमें आपकी खुद की मर्जी है। आपको किसी भी हालत में भगवान का स्मरण करना ही होगा। ठीक इसी प्रकार संस्कार भी मायने रखते हैं। जो इंसान भक्ति भाव में नहीं रखता वह भी अपने संस्कारों के कारण अभी पसंद, नापसंद को एक तरफ रखते हुए धर्म के कामों में शामिल हो जाता है।

उदारता का भाव

गीता ने श्री कृष्ण भगवान ने कहा है की मनुष्य अपने कर्मों से भगवान बनने की ताकत रखता है। हर इंसान में वह शक्ति है कि वह इंसानियत और कर्मों को सर्वोपरि मानकर भगवान के समान बन सकताहै। जी हां, हिन्दू धर्म में ऐसा ही है उदारता का भाव है कि मनुष्य बड़ा ही नरम दिल का होता है। उसमें मार-काट जैसा भाव नहीं होता शायद यही कारण रहा है हिन्दू धर्म के लोगों के साथ जिसने भी चाहा उनकी उदारता का फायदा उठाया और उन पर राज किया।

न्याय और मानवता की रक्षा

हिन्दू धर्म में यदि धर्म से बढ़कर कोई चीज तो वह न्याय और मानवता। यदि कोई मनुष्य हिन्दू धर्म की रक्षा करना चाहता है तो उसे बड़ा ही न्यायी और मानवीय रुख अपनाना होगा। इस धर्म में न्याय और मानव की रक्षा के लिए कुछ भी किया जा सकता है। यहां पर इंसानियत सर्वोपरि है।


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