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भारतीय संस्कृति में महिलाएं स्वाभाविक रूप से सुंदर मानी जाती हैं, और जब उनके शरीर पर गहने सजे होते हैं तो उनकी खूबसूरती और भी निखर जाती है। गहनों में छोटी-छोटी चीजें भी विशेष आकर्षण जोड़ती हैं, जिनमें से एक है चांदी की अंगूठी, जिसे महिलाएं पहनकर साज-श्रृंगार करती हैं। चांदी के आभूषण सोने की तरह ही महिलाओं की सुंदरता में चार चांद लगाते हैं। Astrology in Hindi के अनुसार, चांदी चंद्र ग्रह से संबंधित धातु मानी जाती है, जो मन, भावनाओं और स्त्रीत्व का प्रतीक है। इसलिए चांदी की अंगूठी पहनना न केवल सौंदर्य बढ़ाता है, बल्कि मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा भी प्रदान करता है। लेकिन क्या आपको पता है कि इसके कुछ और ज्योतिषीय लाभ भी होते हैं?
दरअसल ज्योतिष महाज्ञानियों के अनुसार चांदी नौ ग्रहों में शुक्र और चंद्रमा से जुड़ी हुई धातु मानी जाती है। माना जाता है कि चांदी धातु भगवान शिव की आंखों से उत्पन्न हुई थी, इसी कारण यह विश्वास किया जाता है कि जहां चांदी का वास होता है वहां समृद्धि रहती है और किसी भी वस्तु की कमी नहीं रहती। Online kundli in hindi और ज्योतिषीय विश्लेषण के अनुसार, चांदी का प्रभाव व्यक्ति की कुंडली में चंद्र और शुक्र ग्रह को मजबूत करता है, जिससे मानसिक शांति, वैभव और सौभाग्य में वृद्धि होती है।
चांदी के आभूषण विशेष रूप से अंगूठी पहनने से शरीर की शोभा तो बढ़ ही जाती लेकिन इसके कई अन्य फायदे भी जो आपको नीचे जानने को मिलेंगे।
सबसे पहले आपको बाजार जाकर किसी सुनार की दुकान से अपनी पसंद की एक चांदी की अंगूठी खरीदनी चाहिए। इसके बाद गुरुवार की रात उस अंगूठी को साफ पानी में डालकर रख दें। अगली सुबह यानी शुक्रवार के दिन उस अंगूठी को पानी से निकालकर भगवान विष्णु के चरणों में रखें और पूर्ण विधि-विधान के साथ पूजा करें। कुंडली मिलान और ज्योतिषीय नियमों के अनुसार, इस प्रकार विधिवत पूजा करने से चांदी की अंगूठी का प्रभाव और अधिक शुभ हो जाता है तथा व्यक्ति की कुंडली में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
इस प्रकार जब अंगूठी की पूजा अर्चना पूर्ण हो जाए तो फिर उसको चंदन लगाना है और साथ ही धूप-दीप दिखाकर अक्षत भी चढ़ाना होगा। इसके बाद अब आप इस अंगूठी को दाहिने हाथ की सबसे छोटी उंगली अर्थात कनिष्ठा में पहन लें।
ये होते है चांदी की अंगूठी पहनने से सबसे बेहतरीन फायदे
1) ऐसा माना जाता है कि जब आप पूरे विधि-विधान के साथ दाहिने हाथ सबसे छोटी उंगली में चांदी की अंगूठी पहनते है तो आपकी खूबसूरती में बढ़ोतरी होती है और अगर दाग धब्बे है तो वह ख़त्म होने के चांस बढ़ जाते है।
2) इसके अलावा ज्योतिष शास्त्रों की माने तो दाहिने हाथ की सबसे छोटी उंगली में चांदी की अंगूठी पहनने से आपका दिमाग सही रहने लगता है और शांत रहता है और गुस्से पर काबू भी होने लगता है।
3) चांदी की अंगूठी आपके मानसिक क्षमताओं को हल करने में बहुत मदद करती है।
4) यदि आपको कोई बीमारियां है जिसमें मुख्यतः अगर जोड़ों में दर्द, खांसी की समस्या या ऑर्थराइटिस तो यह चांदी की अंगूठी वाकई बहुत मदद करेगी आपके स्वास्थ्य के लिए। विश्वास कीजिये।
5) इसके अलावा अगर कोई व्यक्ति चांदी की अंगूठी पहनना पसंद नहीं करता है वो गले में चैन भी पहन सकते है। ऐसा करने से हकलाने वालों को बहुत लाभ मिलता है।
कुल मिलाकर चांदी हमारे शरीर के लिए शोभा ही नहीं बढ़ाती बल्कि यह कई रोगों और मानसिक तनाव से भी बचाने में मदद करती है। अगर आप चांदी की अंगूठी नहीं पहनते है तो अब शायद जरूर पहन सकते है।
वैदिक ज्योतिष अनुसार चाँदी धातु का संबंध चंद्रमा और शुक्र ग्रह से माना जाता है। चंद्रमा मन का कारक ग्रह है वहीं शुक्र सौंदर्य, प्रेम और विलासिता का प्रतीक माना गया है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार चांदी की उत्पत्ति भगवान शिव के नेत्रों से मानी गई है, इसलिए जहां चांदी होती है वहां शांति, समृद्धि और शुद्धता बनी रहती है।
ज्योतिष के अनुसार दाहिने हाथ की सबसे छोटी उंगली (कनिष्ठा) में चांदी की अंगूठी पहनना शुभ माना जाता है। यह महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए यही नियम है। कनिष्ठा उंगली का संबंध सीधे चंद्रमा से होता है |
शुक्रवार का दिन चांदी की अंगूठी की कुंडली के लिए सबसे शुभ माना जाता है क्योंकि यह दिन शुक्र ग्रह को समर्पित होता है, जो सुंदरता और सुख-सुविधाओं का कारक होता है।
ज्योतिष के अनुसार चांदी की अंगूठी खासतौर पर कर्क, वृषभ, तुला और मीन राशियों के लिए सबसे शुभ माना जाता है।
चाँदी की अंगूठी पहनने से सकारात्मक ऊर्जा आपके अंदर आकर्षित होती है। ज्योतिष के अनुसार, ये खुद की चंद्रमा की स्थिति को मजबूत बनाती है, जिससे मन शांत रहता है, भावनाएँ संतुलित होती हैं और जीवन में स्थिरता आती है।
संक्षेप में कहें तो चाँदी की रिंग पहनने से आपको मानसिक सुकून मिलता है और जिंदगी में एक अच्छा बैलेंस बना रहता है।