कांची कैलाशनाथ मंदिर

ब्रह्मा, विष्णु, महेश के तीन रूप शक्ति का एक ऐसा अवतार है। जिन्होंने जगत का निर्माण किया है। यह तीनों शक्ति जगत के स्वामी है। वैसे तो इन शक्तियों के अलग-अलग तरह से पूजा-अर्चना की जाती है और इनके मंदिर भी अलग ही बने हुए हैं, लेकिन कई मंदिर ऐसे भी है जिनमें तीनों शक्ति एक साथ विराजमान होती है। वहीं ऐसे भी मंदिर है जिनमें शिव और विष्णु अन्य देवताओं के साथ भी विराजमान रहते हैं। बिल्कुल इसी कड़ी में हम आपको भगवान शिव-विष्णु के जग प्रसिद्ध मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं। जो प्राचीन काल से ही अपने संरचना को लेकर चर्चाओं में रहा है। आपको बता दें वह मंदिर कांची कैलाशनाथ मंदिर है। जो तमिलनाडु में द्रविडियन आर्किटेक्चर आकार में बना हुआ है। 

कांची कैलाशनाथ मंदिर का इतिहास

कैलाशनाथ मंदिर भारत के उन मंदिरों में आता है, जिनका निर्माण राजघरानों ने कराया था। दरअसल, कैलाशनाथ मंदिर का निर्माण पल्लव वंश के शासन में हुआ। कहा जाता है कि मंदिर सदियों पुराना है, जो 640-730 ईसवी के बीच बनाया गया था। कैलाशनाथ मंदिर को राजसिम्हा नाम के राजा ने कराया था। मंदिर का निर्माण कराने के पीछे कारण था कि राजा की पत्नी भगवान शिव का एक मंदिर बनें और राजा ने रानी की प्रार्थना करते हुए, बड़ा ही भव्य मंदिर का निर्माण कराया। राजा के बाद मंदिर का निर्माण होता रहा। राजा के पुत्र महेंद्र वर्मन तृतीय ने मंदिर के बाहर बड़े ही सुंदर तरीके से निर्माण कराया था।

कैलाशनाथ मंदिर - अद्भुत वास्तुकला

प्राचीन काल के मंदिर अपनी संरचनाओं से सभी को अचंभित करते हैं। ऐसे ही कांची का कैलाशनाथ मंदिर है। कैलाशनाथ मंदिर की वास्तुकला को प्राचीन भारत की सबसे बेहतरीन वास्तुकला की उपाधि प्राप्त होती है। इसका डिजाइन इतना मनमोहक है कि आर्किटेक्चर समझ नहीं पाते कि इतने प्राचीन समय में इसे किस प्रकार बनाया गया होगा। इसकी डिजाइन मे द्रविड़ स्थापत्य शैली का इस्तेमाल किया गया। इस मंदिर की नींव पत्थरों से रखी गई थी। जिससे आज भी मंदिर को वैसा का वैसा बरकरार रहती है। इस भव्य मंदिर में कई मंदिर भी बने हुए हैं। बता दें कि छोटे-छोटे करीब 50 ऐसे मंदिर हैं। जिनमें हिंदू धर्म के कई देवी-देवताओं की प्रतिमा मौजूद है। आपको बता दें कि परमेश्वर विन्नाराम में मौजूद बैकुंठ पेरूमल मंदिर इसमें एक बड़ा नाम है, जो अनूठे वास्तुकला के रूप में जाना जाता है।

मंदिर की दीवारों पर भगवान शिव और माता पार्वती की नृत्य करते हुए मूर्तियां बनी हुई है। मंदिर परिसर में गुफा भी बनी हुई है। जो इस गुफा को पार कर लेता है सीधा वैकुंठ लोक में स्थान प्राप्त होता है।

इतना ही नहीं मंदिर की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है। मंदिर में 16 शिवलिंग भी मौजूद है जो काली ग्रेनाइट पत्थर से बनी हुई है। वैसे तो मंदिर हमेशा ही अद्भुत और सुंदर लगता है। लेकिन भगवान शिव के सबसे खास त्योंहार शिवरात्रि के मौके पर मंदिर को इस कदर सजाया जाता है कि यहां देखने वाले देखते ही रह जाते हैं। इस मौके पर मंदिर में भव्य महोत्सव का आयोजन किया जाता है।

यह उत्सव तलिमनाडू में नहीं बल्कि पूरे भारत में प्रसिद्ध है। इस मौके पर यहां पर भक्तों की बड़ी भीड़ दर्शन के लिए आती है और शिवरात्रि के मौके पर कांचीपुरम का हिस्सा बनते हैं।

कैलाशनाथ मंदिर जाने का समय

हम आपको बता दें कि मंदिर में आप किसी भी मौसम में जा सकते हैं लेकिन मंदिर के खुले और बंद करने का समय निर्धारित है। लेकिन सुबह 6:00 से 12:00 बजे तक और शाम 4:00 से 7:00 बजे तक ही खोला जाता है। इस मंदिर में जाने के लिए आप भी योजना बनाए और वास्तुकला के इस भव्य मंदिर में घूम कर जरूर आए

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