तिरूपति बालाजी मंदिर - भारत का सबसे अमीर मंदिर

तिरूपति बालाजी का मंदिर

कलयुग के भगवान कहे जाने वाले श्री हनुमान जी हमेशा से ही सभी के लिए अपना योगदान देते रहे है। श्री हनुमान जी ने श्री राम जी के लिए अवतार लिया। इसलिए ही इन्हें श्री राम का साथी कहा जाता है। यदि हनुमान जी ना होते तो श्री राम जी को माता सीता का पता लगाना मुश्किल हो जाता। आपको बता दें कि श्री हनुमान जी को कई और नामों से पुकारा जाता है और इन्हीं नामों के अलग-अलग मंदिर भी है। इन्हें बालाजी, संकट मोचन और कलयुग के देवता भी कहा जाता है। 

आज हम श्रीबालाजी के एक सबसे शक्तिशाली मंदिर के बारे में बता रहे हैं। उस मंदिर का नाम तिरूपति बालाजी मंदिर है। इस मंदिर को कई अन्य नामों से भी जाना जाता है। जैसे वेंकटेश्वर, श्रीनिवास और गोविंदा। यह श्री बालाजी का कोई साधारण मंदिर नहीं है बल्कि बड़ा ही चमत्कारी और शक्तिशाली मंदिर हैं। यह मंदिर सबसे अमीर मंदिरों में से एक है। जो आंध्र प्रदेश में स्थित है। चलिए तो जानते है मंदिर की और चौका देने वाली बातें।

तिरूपति बालाजी मंदिर का इतिहास

किसी भी मंदिर को बनने के पीछे कई कारण छिपें होते है। सतयुग के समय जहां पर भी भगवान ने कुछ भी लीला दिखाइ वहीं स्थान पवित्र हो गया और वहां पर मंदिर बनवा दिया गया। ऐसा ही कुछ बालाजी के मंदिर का इतिहास है। कहा जाता है कि भगवान् विष्णु ने यहां पर तिरूपति बालाजी के रूप में अवतार लिया था। इतिहासकारों के अनुसार मंदिर पांचवी शताब्दी से कांचीपुरा के पल्लव शासकों ने मंदिर पर कब्जा कर अपना अधिकार जमा लिया। जिसके बाद तमिल साहित्य में तिरूपति को त्रिवेंद्रश्वर कहा गया। आपको बता दें कि 15वीं शताब्दी के विजय नगर वंश के पश्चात मंदिर के चमत्कार दूर-दूर तक फैलने शुरू हो गए। वहीं 1843 से 1933 में अंग्रेजी शासन तक मंदिर का हिसाब-किताब हाथीरामजी मठ के महंत ने संभाला। 

1951 में हैदराबाद में निजाम मीर उस्मान अली खान ने मंदिर को 80,000 रूपयें का दान दिया... तब से मंदिर में दान देने का भी प्रचलन शुरू हो गया और मंदिर अमीरों के मंदिर में गिना जाने लगा। अब आंध्र प्रदेश की सरकार ने मंदिर का कामकाज संभालना शुरू कर दिया। 

आपको बता दें कि मंदिर पहाड़ों में स्थित है, जो समुद्र तल से 32 फीट ऊंचाई पर है। यहां तक जाने के लिए पैदल यात्रियों को पहाड़ी पर चढ़ना पड़ता है। जिसके लिए एक मार्ग बनाया गया है। इस मंदिर तक पहुंचकर भक्त यहां श्री तिरूपति बालाजी के दुर्लभ दर्शन कर पाते हैं। 

तिरूपति बालाजी मंदिर की आश्चर्यजनक बातें 

आपको बता दें कि मंदिर इतना प्रसिद्ध है कि यहां पर नेताओं और अभिनेता आते रहते हैं, जो भगवान तिरूपति बालाजी के मंदिर में लाखों का दान भी देते हैं।

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि मंदिर के दरवाजे के दाएं और एक छड़ी खड़ी रहती है। कहा जाता है कि भगवान बालाजी की बचपन में इससे पिटाई हुई थी। जिसकी वजह से उन्हें थोड़ी छोटे लग गई थी और तब से आज तक उन्हें चंदन का लेप लगाया जाता है ताकि घाव भर जाए। भगवान के ठोड़ी पर चंदन का लेप लगाना एक प्रथा बन गया है।

गर्भ ग्रह के मध्य भाग में भगवान तिरूपति की खड़ी हुई मूर्ति विराजित हैं। वहीं भगवान को सजाने के लिए धोती और साड़ी का इस्तेमाल किया जाता है।

भगवान बालाजी के बाल इतने रेशमी है कि हमेशा सुलझे हुए और साफ-सुथरे लगते हैं। एक और चमत्कार यह भी है कि बालाजी की पीठ को जितनी बार भी साफ किया जाता है। उस पर गीलापन ही रहता है यदि भगवान की पीठ पर कोई कान लगाकर सुने तो समुंद्र घोष की आवाजें भी आती है।

भगवान के मंदिर जलने वाले दिए कभी भी नहीं बुझते है। यहां तक की कोई नहीं जानता कि वह चिराग कब से जल रहे हैं।

भगवान तिरूपति बालाजी को यहां विष्णु का अवतार कहा गया है कि भगवान विष्णु ने बालाजी के रूप में अवतार लिया और कहा जाता है कि मंदिर की यात्रा तक पूरी मानी जाती है। जब भगवान विष्णु की पत्नी लक्ष्मी के मंदिर की यात्रा की जाए। जो पद्मावती मंदिर के नाम से मशहूर है और तिरूपति के मंदिर से 5 किलोमीटर की दूरी पर है।

दरअसल  भगवान हमेशा सच्ची निष्ठा और भक्ति के भूखे होते हैं। इसलिए उन्हें केवल प्रेम भाव और एक सच्चा भक्त चाहिए। जो सच्चे मन से भगवान के दर्शन के लिए आता है और उन पर विश्वास करता है। भगवान उसकी मनोकामना को जरूरी पूरी करते हैं। यदि आप भी श्री हनुमान जी और बालाजी के दर्शन करना चाहते हैं तो आंध्र प्रदेश के तिरूपति जी के मंदिर में जरूर जाए।

Recently Added Articles

अंगारक योग
अंगारक योग

अंगारक योग उन कुंडली योगों में शामिल है, जो जिंदगी को दुख देते हैं। किसी की कुंडली में राहु या केतु किसी एक साथ भी...

वैष्णो देवी के दर्शन के बाद, क्यों जरूरी है भैरवनाथ के दर्शन
वैष्णो देवी के दर्शन के बाद, क्यों जरूरी है भैरवनाथ के दर्शन

यह कहा जाता है की पर्वतो की रानी माता वैष्णो देवी अपने भक्तो की हर मुराद पूरी करती हैं। जो भक्त सच्चे दिल से माता के दरबार...

विष योग (Vish Yog) - कारण और निवारण
विष योग (Vish Yog) - कारण और निवारण

कुंडली युगों में एक योग ऐसा भी शामिल है। जिसके नाम से ही मनुष्य विचलित हो जाता है। जी हां, विष योग ही वह योग है...

पितृ पक्ष 2019 - कब शुरू होंगे 2019 श्राद्ध पक्ष
पितृ पक्ष 2019 - कब शुरू होंगे 2019 श्राद्ध पक्ष

पितृ पक्ष सोलह दिन की अवधि है जिसमें हिंदू अपने पूर्वजों का सम्मान करते हैं और उन्हें सम्मान देते हैं।...