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रावण के करीब आते ही क्यों उठा लेती थीं माता सीता तिनका

रावण के करीब आते ही क्‍यों घास का तिनका उठा लेती थीं माता सीता

रामायण के अंदर निश्चित रूप से आप ने देखा होगा कि जब रावण माता सीता का हरण करके लंका ले गया था तो उस समय जब भी रावण माता सीता के सामने आता था तो सीता माता एक घास का तिनका अपने सामने ले लेती थी। बचपन से ही इस कहानी के पीछे जो तर्क बताया गया है वह यह भी रखा गया है  कि सीता माता घास के इस दिन के को एक तलवार के रूप में इस्तेमाल किया करती थी लेकिन आपको बता दें कि ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। इस घास के तिनके के पीछे असली कहानी कुछ और ही है। तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि रावण जब भी लंका में माता सीता के सामने आता था तो माता सीता आखिर क्यों घास का तिनका उठा लेती थी - 

यह कहानी तब से शुरू हुई जब पहली बार शादी के बाद नई दुल्हन के रूप में माता सीता भगवान राम के घर पहुंची थी। हमेशा से ही सनातन धर्म में ऐसा रीति-रिवाज रहा है कि नई दुल्हन पहली बार जब ससुराल में खाना बनाती है तो वह खाने में सबसे पहले कुछ मीठा बनाती हुई नजर आती है। माता सीता जब पहली बार अयोध्या गई थी तो भगवान राम के घर पर माता सीता ने खीर बनाई थी। सभी लोग बैठकर खीर खाने ही वाले थे कि तभी एक बहुत जोर से हवा का झोंका आया था और उस हवा के कारण राजा दशरथ की खीर में एक तिनका गिर गया था। अब सीता माता उस तिनके को देख तो पा रही थी लेकिन वह यह नहीं समझ पा रही थी कि किस तरीके से राजा दशरथ की खीर से इस दिन के को निकाल कर बाहर फेंके।

माता सीता ने किया था चमत्कार

माता सीता ने एक अद्भुत चमत्कार किया था और उस चमत्कार से ही तिनका राजा दशरथ की खीर से बाहर निकल गया था। दरअसल माता सीता ने उस दिन के को ऐसी नजर से देखा था कि वह तिनका जलकर राख हो गया था और किसी को नजर नहीं आ रहा था लेकिन राजा दशरथ ने देख लिया था और उस समय किसी को नहीं बताया था। बाद में माता सीता को जब राजा दशरथ ने अपने कक्ष में बुलाया तो उनके सामने बोला कि मैंने आज जो चमत्कार देखा है वह निश्चित रूप से एक जगत जननी ही कर सकती है आप कोई निश्चित रूप से सामान्य महिला नहीं हैं लेकिन मेरा आपसे एक अनुरोध है कि आप अपने दुश्मन को भी कभी इस नजर से ना देखें।

राजा दशरथ लिया यह वचन

राजा दशरथ को दिए हुए इसी वचन के कारण माता सीता कभी भी रावण को ऐसी नजर से नहीं देख रही थी बल्कि रावण के सामने आने पर वह तिनके को सामने रख लेती। अगर माता सीता चाहती तो रावण को उसी समय भस्म कर सकती थी लेकिन माता सीता राजा दशरथ को दिए हुए वचन से बंधी हुई थी और यही कारण है कि माता सीता रावण के सामने आने पर एक घास का तिनका अपने सामने रखती थी।


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