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लोहड़ी भारत के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों में विशेषतः पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और राजस्थान जैसे राज्यों में त्योहारों का एक महत्वपूर्ण और उल्लासमय हिस्सा है। लोहड़ी 2026 मकर संक्रांति के साथ मेल खाता है और पूरे क्षेत्र में नए साल तथा फसल की कटाई का शुभ अवसर के रूप में मनाया जाता है। प्राचीन काल से चली आ रही परंपराओं का यह त्योहार फसल की खुशी का प्रतीक ही नहीं है, बल्कि स्थानीय सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और लोकगीतों का भी उत्सव है। आओ lohri in hindi के बारे में और जानें। साथ ही, बहुत से लोग इस समय astrology in hindi से जुड़े मार्गदर्शन भी देखते हैं ताकि नए वर्ष की शुभता को समझ सकें।
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यह एक प्राचीन पर्व है जो सर्दियों के अंत और बसंत के आगमन का प्रतीक है। लोहड़ी पर्व मुख्य रूप से पंजाबी लोग मनाते है, लेकिन अब यह पूरे उत्तर भारत में लोकप्रिय हो गया है। लोहड़ी 2026 में भी लोग नए गेहूं और जौ की बालियों के साथ आग जलाने, पारंपरिक नाच-गानों और गीतों के साथ मनाया जाता है। बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी मिलकर आग के चारों ओर नाचते-गाते हैं। परिवारों द्वारा घरों में पकाए गए विशेष पकवान जैसे गजक, तिल और गुड़ से बनी मिठाइयां परोसते हैं।
यह त्यौहार सामाजिक मेलजोल, प्रेम और सद्भावना का प्रतीक है, जिसमें घर और समुदाय के बीच खुशियों का आदान-प्रदान होता है। लोहड़ी का महत्व फसल की कटाई से जुड़ा है, जो किसानों के लिए नई उम्मीद लेकर आता है और इसी समय दक्षिण भारत में Pongal in hindi 2026 भी मनाते हैं, जो फसल उत्सव का एक और रूप है।
यह त्यौहार आमतौर पर 13 या 14 जनवरी को मनाई जाती है, लेकिन लोहड़ी हर साल मकर संक्रांति से एक दिन पहले मनाया जाता है। यह पर्व सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के साथ शुरू होता है। अधिक जानकारी के लिए makar sankranti in hindi 2026 देखें, क्योंकि दोनों पर्व एक-दूसरे से जुड़े हैं।
लोहड़ी पर्व अपने साथ कई परंपराएं लेकर आता है:
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इतिहास में लोहड़ी का महत्व थोड़ा अस्पष्ट है, क्योंकि इस त्योहार की उत्पत्ति को लेकर कई अलग-अलग कहानियां प्रचलित हैं। फिर भी, ज्यादातर कथाओं में माना जाता है कि यह पर्व सबसे पहले हिमालय की पर्वत श्रृंखलाओं वाले इलाकों में शुरू हुई थी। इन क्षेत्रों में सर्दी देश के बाकी हिस्सों से कहीं ज्यादा होती है। रबी की फसल कटाई के बाद लोग अलाव के इर्द-गिर्द जमा होते हैं और शीतकालीन संक्रांति को अलविदा कहते हैं। यह समय वसंत ऋतु के आने का संकेत देता है, जो हर किसी के जीवन में समृद्धि और फलदायी दिनों की शुरुआत करता है।
ऐसा माना जाता है कि लोहड़ी पर्व सूर्य देव को समर्पित है, इसलिए लोग ठंड के बाद जीवन में फिर से गर्मी और रोशनी लौटाने की प्रार्थना करते हैं। साथ ही, यह त्योहार किसानों के लिए बिक्रम कैलेंडर के अनुसार नए वित्तीय साल की शुरुआत भी माना जाता है। फसल कटने के बाद इसी दिन लगान इकट्ठा होता है, जो नई आर्थिक शुरुआत का प्रतीक बनता है।
लोहड़ी पर अग्नि देव की पूजा से घर-परिवार में समृद्धि आती है। विवाह से पहले कुंडली मिलान करवाकर अपने रिश्ते को स्थिर और मंगलमय बनाएं
Q: क्या लोहड़ी सिर्फ पंजाब में मनाई जाती है?
Ans: नहीं, लोहड़ी का त्यौहार पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, जम्मू और दिल्ली में भी धूमधाम से मनाई जाती है।
Q: लोहड़ी और मकर संक्रांति में क्या अंतर है?
Ans: लोहड़ी मुख्य रूप से पंजाबी पर्व है, जबकि मकर संक्रांति पूरे भारत में मनाई जाती है।
Q: लोहड़ी में अलाव क्यों जलाया जाता है?
Ans: क्योंकि लोहड़ी बुराई का नाश और नई शुरुआत का प्रतीक माना है, साथ ही ठंड से बचाव भी।
Q: लोहड़ी का सबसे प्रसिद्ध गीत कौन सा है?
Ans: "सुंदर मुंदरिये" "मस्साण लेया" तिल चोलिये नी" दुल्ला भट्टी वाला बहुत लोकप्रिय है।
Q: लोहड़ी में कौन से नृत्य किए जाते हैं?
Ans: भांगड़ा और गिद्दा सबसे प्रमुख हैं।
Q: लोहड़ी और पोंगल में क्या समानता है?
Ans: लोहड़ी और पोंगल दोनों फसल उत्सव हैं और सूर्य की मकर राशि में प्रवेश पर आधारित हैं।
Q: लोहड़ी में बच्चे क्या करते हैं?
Ans: बच्चे घर-घर जाकर लोहड़ी के गीत गाते हैं और उपहार (रेवड़ी, मूंगफली) इकट्ठा करते हैं।