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जया एकादशी एक उपवास प्रथा है जो हिंदू कैलेंडर के अनुसार, माघ के महीने में शुक्ल पक्ष (चंद्रमा का सबसे चमकीला पखवाड़ा) के दौरान एकादशी तिथि को मनाया जाता है। यदि आप गोरियन कैलेंडर का पालन करते हैं तो यह जनवरी-फरवरी के महीनों के बीच आता है। ऐसा माना जाता कि अगर यह एकादशी गुरुवार को पड़ती है, तो यह और भी शुभ माना जाता है। यह एकादशी भगवान विष्णु के सम्मान में मनाई जाती है, जो तीन मुख्य हिंदू देवताओं में से एक है।
इस साल अर्थात 2026 में जया एकादशी 25 जनवरी को पड़ने वाली है। इस दिन पूरे भारतवर्ष में अनगिनत भक्त विष्णु जी के नाम व्रत रखेंगे और उनकी पूजा अर्चना करेंगे। जया एकादशी व्रत लगभग सभी हिंदुओं, विशेषकर भगवान विष्णु के अनुयायियों द्वारा उनके दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए मनाया जाता है। यह भी प्रचलित मान्यता है कि इस एकादशी का व्रत रखने से सभी पाप धुल जाते हैं और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। जया एकादशी को दक्षिण भारत के कुछ हिंदू समुदायों, विशेष रूप से कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के कुछ समुदायों में भूमी एकादश और भीष्म एकादशी के रूप में भी जाना जाता है। इस पावन अवसर पर कई श्रद्धालु अपनी फ्री जन्म कुंडली का विश्लेषण भी करवाते हैं, ताकि यह समझ सकें कि विष्णु पूजा, व्रत और आध्यात्मिक साधना का उनके ग्रहों, कर्मफल और आने वाले समय पर क्या शुभ प्रभाव पड़ सकता है।
जैसा कि आपने 2026 के लिए जया एकादशी की जानकारी मांगी है, यहाँ अपडेटेड विवरण दिया गया है। आपकी दी गई 2022 की जानकारी के अनुसार, जया एकादशी माघ मास के शुक्ल पक्ष में आती है।
2026 में, जया एकादशी 25 जनवरी, रविवार को पड़ेगी।
यहाँ 2026 के लिए जया एकादशी से संबंधित शुभ मुहूर्त दिए गए हैं:
जया एकादशी तिथि: 25 जनवरी 2026, रविवार
एकादशी तिथि प्रारंभ: 24 जनवरी 2026 को रात 10:25 बजे
एकादशी तिथि समाप्त: 25 जनवरी 2026 को रात 11:27 बजे
सूर्य उदय (25 जनवरी 2026): सुबह 07:12 बजे (यह आपके स्थान के अनुसार थोड़ा भिन्न हो सकता है)
सूर्यास्त (25 जनवरी 2026): शाम 06:05 बजे (यह आपके स्थान के अनुसार थोड़ा भिन्न हो सकता है)
पारणा मुहूर्त (व्रत तोड़ने का समय) - 26 जनवरी 2026: सुबह 07:12 बजे से सुबह 09:20 बजे तक
1. जया एकादशी के दिन मुख्य उपासक व्रत होता है। भक्त पूरे दिन उपवास रखते हैं, बिना कुछ खाए या पीए। वास्तव में व्रत की शुरुआत दशमी तिथि (10वें दिन) से होती है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि सूर्योदय के बाद एकादशी पर पूर्ण उपवास रखा जाता है, इस दिन कुछ भी भोजन नहीं किया जाता है। हिंदू भक्त एकादशी के सूर्योदय से द्वादशी तिथि (12वें दिन) के सूर्योदय तक निर्जल उपवास रखते हैं। इस व्रत के दौरान कई लोग जीवन में आ रही चुनौतियों को समझने के लिए ज्योतिष परामर्श भी लेते हैं।
2. उपवास करते समय, व्यक्ति को क्रोध, वासना या लालच की भावनाओं को अपने दिमाग में प्रवेश नहीं करने देना चाहिए। यह व्रत शरीर और आत्मा दोनों को शुद्ध करने के लिए है। इस व्रत के पालनकर्ता को द्वादशी तिथि को ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए और उसके बाद उनका व्रत तोड़ना चाहिए। व्रत रखने वाले को पूरी रात नहीं सोना चाहिए और भगवान विष्णु की पूजा करते हुए भजन गाना चाहिए। कुछ लोग इस दिन अपने वैवाहिक जीवन की सामंजस्यता के लिए कुंडली मिलान भी करवाते हैं।
3. ऐसे लोग जो पूर्ण उपवास का पालन नहीं कर सकते, वे दूध और फलों पर आंशिक उपवास रख सकते हैं। यह अपवाद बुजुर्ग लोगों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर शारीरिक बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए है।
4. यहां तक कि जो लोग जया एकादशी का व्रत नहीं करना चाहते हैं उन्हें चावल और सभी प्रकार के अनाज से बने भोजन खाने से परहेज करना चाहिए। शरीर पर तेल लगाने की भी अनुमति नहीं है। आध्यात्मिक साधकों के अनुसार, व्रत के साथ जीवन के नकारात्मक प्रभाव कम करने में उपयुक्त रत्न धारण करना भी सहायक माना जाता है।
5. इस एकादशी पर भगवान कृष्ण की पूजा प्रातः काल में की जाती है और उन्हें पंचामृत तथा फूल चढ़ाए जाते है।
6. जया एकादशी पर पूरे समर्पण के साथ भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। भक्त सूर्योदय के समय उठते हैं और जल्दी स्नान करते हैं। भगवान विष्णु की एक छोटी मूर्ति पूजा स्थल पर रखी जाती है और भक्त भगवान को चंदन का लेप, तिल, फल, दीपक और धुप अर्पित करते हैं। इस दिन विष्णु सहस्त्रनाम और नारायण स्तोत्र का पाठ करना शुभ माना जाता है। और कई भक्त इस अवसर पर free astrology in hindi पढ़कर शुभ-अशुभ समय की जानकारी जानने का प्रयास करते हैं।
हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे |
हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे हरे ||
जया एकादशी 2026, जो 25 जनवरी को मनाई जाएगी, हिंदू धर्म में पवित्र व्रतों में से एक है। माघ मास में आने वाली यह एकादशी शुभ फल और पापों से मुक्ति प्रदान करने वाली मानी जाती है। इसी तरह वर्षभर के अन्य महत्वपूर्ण त्योहार भी आध्यात्मिक रूप से खास महत्व रखते हैं, जैसे Mauni Amavasya in Hindi 2026, जिसमें मौन व्रत और गंगा स्नान का अद्वितीय महत्व है। नए साल की आध्यात्मिक ऊर्जा को बढ़ाने वाले पर्वों में लोहड़ी 2026 का अग्नि पूजन, Makar Sankranti in Hindi 2026 का सूर्य की उत्तरायण यात्रा, और दक्षिण भारत का फसल पर्व Pongal in Hindi 2026 भी शुभता का संदेश देते हैं। इसके बाद विद्या और वसंत के आगमन का प्रतीक Basant Panchami in Hindi 2026 विशेष रूप से ज्ञान और सरस्वती पूजा के लिए Auspicious माना जाता है।