Chhath Puja

छठ पूजा 2026 तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, कथा और महत्व जानें। Chhath Puja in Hindi की पूरी जानकारी और chhath puja celebration का धार्मिक महत्व यहाँ पढ़ें।

छठ पूजा

भारत को त्योहारों का देश यूं ही नहीं कहा जाता है। आइए आपको बताते हैं chhath puja का महत्व, पूजा विधि, समय और इस पर्व की पौराणिक कथा।” यहां होली, रक्षाबंधन, दशहरा, दिवाली, भाईदूज, गुरु पर्व और ईद का अपना अलग ही महत्व है। इन त्योहारों की धूम न केवल देश में बल्कि विदेश में भी देखने को मिलती है। विदेश में भारतीय प्रवासी इन त्योहारों का जमकर लुत्फ उठाते हैं। विदेश में भारतीय प्रवासी भी इस पर्व का उत्साहपूर्वक हिस्सा बनते हैं और chhath puja celebration बड़े ही धूमधाम से करते हैं। यह पर्व बिहारवासियों के लिए खास महत्व रखता है। लेकिन बिहार के साथ यूपी, पूर्वांचल, झारखण्ड और नेपाल के कई हिस्सों में मनाया जाने वाला यह लोकपर्व आज महापर्व का रूप ले चुका है। यह chhath parv बिहार, यूपी, झारखंड और नेपाल में बड़े पैमाने पर मनाया जाता है। चार दिन तक चलने वाले इस त्यौहार में महिलाएं 36 घंटे का उपवास रखती हैं और अपने पति और पुत्र के लिए दीर्घायु की कामना करती हैं। आइए आपको बताते हैं छठ पर्व का महत्व, पूजा विधि, समय और इस पर्व की पौराणिक कथा।

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कब मनाया जाता है छठ पूजा (Chhath Puja)  का पर्व

छठ पर्व की महिमा अपार है, शास्त्रों के अनुसार छठ chhath puja पूजा कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से शुरू होकर कार्तिक शुक्ल सप्तमी तक होती है। इस बार यह नहाय खाय के साथ 13 नवंबर को शुरू होगा और सूर्योदय अर्घ्य के साथ खत्म होगा। इसे सूर्योपासना का पर्व भी कहा जाता है। सुख-स्मृद्धि तथा मनोकामना पूर्ति के इस त्यौहार को सभी स्त्री और पुरुष समान रूप से मनाते हैं।

छठ पूजा सूर्य और प्रकृति के प्रति आभार का पर्व है। इस शुभ दिन पर दांपत्य जीवन में प्रेम और सामंजस्य हेतु  से जुड़ी जानकारी कुंडली मिलान अवश्य करें।  

छठ पूजा की तिथि और पूजा मुहूर्त

chhath puja का शुभ मुहूर्त 15 नवंबर 2026 को पड़ रहा है।

छठ पूजा का दिनछठ पूजा तिथिछठ पूजा अनुष्ठान
शुक्रवार13 नवंबर 2026नहाय खाय
शनिवार14 नवंबर 2026खरना
रविवार15 नवंबर 2026संध्या अर्घ
सोमवार16 नवंबर 2026सूर्योदय/उषा अर्घ

बहुत से लोग पूछते हैं – छठ पूजा कब है 2026, तो इस बार यह 13 नवंबर 2026 से 16 नवंबर 2026 तक मनाया जाएगा। छठ पूजा 2026 का आरंभ 13 नवंबर 2026 को ‘नहाय-खाय’ से होगा और 16 नवंबर 2026 को उषा अर्घ्य के साथ समाप्त होगा। धार्मिक मान्यता है कि छठ पूजा का शुभ मुहूर्त में अर्घ्य देने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

यदि आप इस पर्व से जुड़े ग्रहों के प्रभाव समझना चाहते हैं तो वैदिक ज्योतिष के अनुसार छठ पूजा का आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।

छठ पर्व की पौराणिक कथा (Story of Chhath Puja)

प्राचीन काल से ही छठ पूजा chhath puja  का विशेष महत्व रहा है।  आइए जानते हैं छठ पूजा की कहानी, जिसमें कुंती और द्रौपदी द्वारा किए गए व्रत का वर्णन है इसका आरंभ महाभारत काल में कुंती ने किया था। सूर्य की आराधना से ही कुंती को पुत्र कर्ण की प्राप्ति हुई थी। इसके बाद कुंती पुत्र कर्ण ने सूर्य देव की पूजा शुरू की, वह भगवान सूर्य का परम भक्त था, प्रतिदिन घंटों कमर तक पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देता था। सूर्य की कृपा पाकर ही वह आगे चलकर महान योद्धा बना। इसलिए आज भी छठ पूजा में अर्घ्य दान की पद्धति प्रचलित है। 

वहीं दूसरी ओर पांडवों की पत्नी द्रौपदी को भी नित्य सूर्य की पूजा करने के लिए जाना जाता है। वे अपने परिजनों के उत्तम स्वास्थ्य की कामना और लंबी उम्र के लिए नियमित सूर्य देव की पूजा किया करती थी। जब पांडव अपना सारा राजपाट जुए में हार गए थे, तब द्रौपदी ने छठ का व्रत रखा था। इस छठ के व्रत से द्रौपदी की सभी मनोकामनाएं पूरी हुईं साथ ही पांडवों को राजपाट भी वापस मिल गया।

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दरअसल, कार्तिक शुक्लपक्ष की षष्ठी को मनाया जाने वाले छठ पर्व पारिवारिक सुख-स्मृद्धि तथा मनोवांछित फलप्राप्ति के लिए प्रसिद्ध है। छठ देवी सूर्य देव की बहन हैं और उन्हीं को प्रसन्न करने के लिए भगवान सूर्य की आराधना कि जाती है तथा गंगा-यमुना या किसी भी पवित्र नदी या पोखर के किनारे पानी में खड़े होकर यह पूजा संपन्न की जाती है।

छठ पूजा का आरंभ कार्तिक माह की शुक्ल चतुर्थी व समापन सप्तमी को होता है। पहले दिन ‘नहाय-खाय’ के रूप में मनाया जाता है। दूसरे दिन कार्तिक शुक्ल पंचमी को खरना किया जाता है, पंचमी को दिनभर खरना का व्रत रखने वाले व्रती शाम के समय गुड़ से बनी खीर, रोटी और फल का सेवन प्रसाद रूप में करते हैं। लेकिन व्रत रखने वाला व्रत समाप्त होने के बाद ही अन्न और जल ग्रहण करते हैं। 

छठ व्रत की पूजा विधि 

छठ पर्व से दो दिन पहले चतुर्थी के दिन स्नानादि करके भोजन किया जाता है। पंचमी को उपवास करके संध्याकाल में किसी तालाब या नदी में स्नान करके सूर्य भगवान को अर्ध्य दिया जाता है। तत्पश्चात पारण किया जाता है। पूरा दिन बिना जल पिये नदी या तालाब पर जाकर स्नान किया जाता है और सूर्यदेव को अर्ध्य दिया जाता है।

अर्ध्य देने विधि 

एक बांस के सूप में केला एवं अन्य फल, अलोना प्रसाद, ईख आदि रखकर उसे पीले वस्त्र से ढक दें। तत्पश्चात दीप जलाकर सूप में रखें और सूप को दोनों हाथों में लेकर निम्न मंत्रों का जाप करें।

ऊं अद्य अमुकगोत्रोअमुकनामाहं मम सर्व

पापनक्षयपूर्वकशरीरारोग्यार्थ श्री

सूर्यनारायणदेवप्रसन्नार्थ श्री सूर्यषष्ठीव्रत करिष्ये।

ऊं एहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजोराशे जगत्पते।

अनुकम्पया मां भवत्या गृहाणार्ध्य नमोअस्तुते॥

इस मन्त्र का उच्चारण करते हुए तीन बार अस्त होते हुए सूर्यदेव को अर्ध्य दें।  क्ति और आध्यात्म से परिपूर्ण इस पर्व के लिए न तो विशाल पंडालों की, न भव्य मंदिरों की और ना ही ऐश्वर्य युक्त मूर्तियों की जरूरत होती है। यह लेख chhath puja in hindi में आपको इसके महत्व, तिथि और कथा की पूरी जानकारी देता है।

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